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जिला मुख्यालय एवं तहसील मुख्यालयों पर ज्ञापन देंगे संगठन

मथुरा। तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे देशव्यापी आंदोलन के तहत किसान संगठनों ने शनिवार को चक्काजाम का ऐलान किया था। जिसे शुक्रवार को वापस ले लिया गया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष राजकुमार तौमर ने बताया कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह फैसला लिया है।

राष्ट्रीय नेतृत्व के आदेश से ही आंदोलन आगे बढ रहा है। मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र मलिक ने जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड राज्य में कृषि कार्य व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर कल छह फरवरी को होने वाला चक्का जाम वापस कर जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी को ज्ञापन दंेने। दोनों राज्यों के  अलावा पूरे देश मे चक्का जाम किया जाएगा।


चक्का जाम को सफल बनाने के लिए किसान संगठनों के साथ राजनीतिक दलों ने भी अपनी ओर से पूरी तैयारी की थी। किसान संगठन राजनीतिक पार्टियों से दूरी बनाये रखने की बात दोहरा रहे हैं, वहीं राजनीतिक लोगों की ओर से किसान हित में काम करने की बात कही जा रही है।


  किसान नेताओं की ओर से तीन घंटे के चक्काजाम की बात कही गई थी। पुलिस के लिए सिरदर्दी यह था कि इस चक्का जाम का कोई एक नियत स्थान तय नहीं था। दूसरी ओर किसी एक मार्ग पर जाम करने का ऐलान नहीं किया गया था। जिस तरह की अभी तक किसान संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से तैयारी देखने को मिल रही थी उससे यही लग रहा था कि जनपदभर में यहां वहां रोड जाम किये जाने की रणनीति बनाई गयी है।

अभी तक दिल्ली आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को इस आंदोलन के तहत जाम नहीं किया गया है। इस बार कांग्रेस ने खूंटैल पट्टी के किसानों के साथ हाइवे को जाम करने की बात कही थी।

कस्बा सौंख के पास गांव लोरिया पट्टी मंे कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक चैधरी ने किसानों के साथ पंचायत कर चक्कजाम की रणनीति तैयार की थी। दीपक चैधरी मूलरूप से इसी पट्टी के गांव बछगांव के रहने वाले हैं। क्षेत्र मंे ग्रामीणों के बीच उनका प्रभाव भी है। खूंटैल पट्टी में किसान महापंचायत होने जा रही है।

इस चक्काजाम के जरिये कांग्रेस जिलाध्यक्ष दीपक चैधरी आठ फरवरी की किसान महापंचायत की तैयारियों को लेकर भी आश्वस्त होना चाहते था। चक्काजाम में जुटी भीड जुटाकर कांग्रेस यह तय करना चाहती थी कि कांग्रेस की किसान महापंचायत की सूरत क्या रहने जा रही है।

भारतीय किसान यूनियन की ओर से कई बार यमुना एक्सप्रेस वे पर प्रदर्शन किया जा चुका है। दूसरी ओर राया, नौहझील, बल्देव, छाता, मांट आदि में किसान स्थानीय तौर पर प्रदर्शन कर सकते थे।

 

नारद संवाद

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