देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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देहरादून । उत्तराखंड में चमोली जिले में जोशीमठ के समीप हाथीपहाड़ की चोटी से आये मलबे के कारण शुक्रवार को ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिये अवरूद्ध हो गया। बद्रीनाथ मार्ग पर भूस्सखलन से करीब 15000 तीर्थयात्री फंस गए। चमोली के जिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि सीमा सडक़ संगठन के जवान मलबे को साफ करने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि बद्रीनाथ की यात्रा पर आये श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत न हो, इसके लिये उन्हें जोशीमठ, पीपलकोटी, कर्णप्रयाग, गोविंदघाट और बद्रीनाथ में ही सुविधाजनक स्थानों पर ठहरने को कहा गया है। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) का कहना है कि सडक़ को दोबारा चालू करने में 2 दिन तक का वक्त लग सकता है।
शुक्रवार की दोपहर को करीब 3.30 बजे जोशीमठ से करीब 8 किलोमीटर दूर विष्णुप्रयाग के पास पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा सडक़ पर आ गिरा। गनीमत रही कि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। लेकिन पहाड़ी टूटने से बद्रीनाथ का रास्ता बंद हो गया है। सडक़ का करीब 150 मीटर का हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया है। पहाड़ का ये हिस्सा पिछले 2 दिनों से दरक रहा था। लिहाजा यात्रियों को दुर्घटनास्थल से करीब 200 मीटर पीछे ही रोक दिया गया था। हादसे की वजह से करीब 15 हजार यात्री बद्रीनाथ धाम के रास्ते में फंस गए हैं। उत्तराखंड सरकार ने उनके ठहरने के लिए उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों को वहीं रुकने के लिए कहा गया है। रास्तों में खड़ी गाडय़िों को भी रोके रखने के आदेश दिये गए हैं। हालत ये है कि देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु अब सडक़ के दोनों ओर बैठकर इंतजार कर रह रहे हैं। कुछ लोग रास्ते से ही लौटने की भी तैयारी कर रहे हैं।
आपको बता दें कि ये वही जगह है जहां साल 2015 में भी भूस्सखलन हुआ था। तब भी ये रास्ता करीब 1 हफ्ते तक बंद रहा था। उस वक्त की सरकार ने यात्रियों को निकालने के लिए सब्सिडी पर हेलीकॉप्टर यात्राएं शुरू करवाई थीं। इस बार बीआरओ के अधिकारी सडक़ को 2 दिनों मे दोबारा खोलने का दावा कर रहे हैं।
साभार-khaskhabar.com













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