BREAKING NEWS

दिल्ली : राहुल गांधी ने शुरू की ‘सत्याग्रह’ पहल, लोगों से मांगी अन्याय के खिलाफ संघर्ष की कहानी || दिल्ली : नशीले पदार्थों की तस्करी के सरगना नवप्रीत सिंह का प्रत्यर्पण, केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया- 'मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि' || पटना : बाढ़ प्रभावित इलाकों में वायुसेना का राहत अभियान, हेलीकॉप्टरों से 10 टन सामग्री पहुंचाई गई || जोधपुर : केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को जन्मदिन पर बधाईयों का तांता, पीएम मोदी समेत नेताओं ने दी शुभकामनाएं || उत्तर प्रदेश : हापुड़ में मुठभेड़ के बाद पांच अपराधी गिरफ्तार, पुलिस ने 55 लाख के सामान से भरे कैंटर लूट की घटना को सुलझाया

जीएसटी के वर्तमान स्वरूप में व्यापार करना संभव नहीं : अमित जैन

मथुरा। कैट के देशव्यापी भारत बंद के आह्वान के क्रम में स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया जिसे नगर मजिस्ट्रेट द्वारा लिया गया।

ज्ञापन के अनुसार सरकार के कुछ निर्णयों के कारण भारत का व्यापारी समाज कराह रहा है। 2017 जुलाई में जब टैक्स नियमों के रूप में जीएसटी को लागू किया गया था तब  देश के व्यापारी समाज ने बड़े उत्साह के साथ जीएसटी प्रणाली का स्वागत किया था और व्यापारी समाज को एक आशा थी कि नई कर प्रणाली से व्यापारी समाज ईमानदारी के साथ समरस होकर सरकार को अधिकाधिक कर देते हुए राष्ट्र निर्माण में  महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका का निर्वहन करेगा, लेकिन व्यवहार में मौजूदा कर प्रणाली व्यापारी समाज तथा व्यापारियों के लिए एक बड़ी परेशानी बन चुकी है, जिसके कारण व्यापार करने में असमर्थता आ रही है।

भारत का व्यापारी अपने भारत देश को दुनिया का सर्वोत्तम देश बनाने में सरकार की सोच के अनुरूप हर प्रकार के सहयोग हेतु तत्पर रहता है, लेकिन जब उसी व्यापारी के सम्मुख इस प्रकार की कर प्रणाली होगी जो कि उसके लिए जी का जंजाल बन जाएगी तो फिर व्यापारी के लिए यह सब असंभव होता जा रहा है। विगत चार वर्षों में जीएसटी में लगभग 950 संशोधन किए गए हैं। कोई भी संशोधन लाने से पहले व्यापारियों से जीएसटी की परेशानियों को जानने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

प्रत्येक दिन एक नया प्रावधान लागू कर दिया जाता है, जिसका पालन करना व्यापारियों के लिए बेहद मुश्किल भरा है। वर्तमान में जीएसटी का जो स्वरूप है उस स्वरूप के अनुसार व्यापार करने की व्यापारी की क्षमता नहीं है। जीएसटी में लागू किए गए नए प्रावधान जीएसटी अधिकारियों के पोषण एवं व्यापारियों के शोषण के प्रतीक हो गए हैं ।

अतः आपसे नम्र निवेदन है कि राष्ट्र, समाज व व्यापारी हित को दृष्टिगत रखते हुए वर्तमान कर प्रणाली जीएसटी को सुगम व सरल बनाने हेतु व्यापारी संगठनों से परामर्श कर उसे व्यवहारिक बनाया जाए, जिससे कि भारत का व्यापारी समाज ईमानदारी के साथ पूर्ण मनोयोग से राजस्व संग्रह में सहयोग कर सकें। ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में कैट के प्रांत संयोजक अमित जैन, जिलाध्यक्ष जुगल किशोर अग्रवाल, महामंत्री संजय बंसल, कोषाध्यक्ष दिनेशचंद अग्रवाल, वरिष्ठ व्यापारी नेता मदन मोहन श्रीवास्तव, विजय बंटा सर्राफ, चैधरी विजय आर्य आदि प्रमुख रहे।

 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

स्विट्ज़रलैंड: पहाड़ों पर कुदरत का करिश्मा, मशीनों का जलवा और हम सबको  ‘आज खाने में क्या है की चिंता?’

Read More

Bollywood


विविधा


शंखनाद

राइन फॉल्स, स्विस सीढ़ियाँ और बुज़ुर्ग घुटने: नाव की सैर बनी ओलंपिक प्रतियोगिता!

Read More