देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में पढऩे वाली विवाहित लड़कियों को 45 दिनों तक की मातृत्व अवकाश देने का निर्णय लिया है ताकि वे बिना किसी रूकावट या बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर सके। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस आशय के दिशा-निर्देशों को मंजूरी प्रदान कर दी है।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने बताया कि इन दिशा-निर्देशों के अनुसार महिला विद्यार्थी वैध चिकित्सा प्रमाण पत्र के प्रस्तुत करने पर संबंधित विभागाध्यक्ष की पूर्व अनुमति से, एक बार में निरंतर 45 दिन तक का मातृत्व अवकाश लेने की पात्र होंगी।
उन्होंने कहा कि महिला विद्यार्थियों को मातृत्व अवकाश सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस शर्त के साथ प्रदान किया जाएगा कि यदि महिला विद्यार्थी सरकारी अस्पताल के अधिकारियों की सिफारिश पर सरकारी महिला कर्मचारियों के मामले में निर्धारित नियमों के अनुसार लागू 45 दिनों तक मातृत्व अवकाश लेती हैं, तो उन्हें छात्रों को विनिर्दिष्ट पाठ्यक्रम या पेशेवर या अनुसंधान कार्यक्रम के लिए उपस्थिति की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कक्षाएं लगानी होंगी। उन्होंने बताया कि अवकाश अवधि सेमेस्टर के दौरान दिए गए कुल व्याख्यानों में से निकाल दी जाएगी, परन्तु संबंधित विद्यार्थी को उस विभाग या विश्वविद्यालय द्वारा अधिसूचित कार्यक्रम के अनुसार सभी गौण और प्रमुख परीक्षाओं में भाग लेना होगा।
मंत्री ने बताया कि हालांकि, यदि आवश्यकता हो, तो विद्यार्थी एक पूरा सेमेस्टर छोड़ सकता है, लेकिन अंतिम सेमेस्टर परीक्षा में भाग लेने के बाद उसे छोड़े गए उस सेमेस्टर की हाजिरी पूरी करने होगी और सम तथा विषम सेमेस्टर नीति के अनुसार छोड़ी गई सेमेस्टर परीक्षाओं में भाग लेना होगा। ऐसे मामलों में, यदि वह छोड़े गए सेमेस्टर शुल्क का भुगतान पहले ही कर चुका है तो उसे उस सेमेस्टर की हाजिरी पूरी करने के लिए पुन: प्रवेश शुल्क और पूरे सेमेस्टर शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।
साभार-khaskhabar.com













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