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MATHURA : ग्राम पंचायत की खाली जमीन पर गायों के लिए उगाया जाएगा चारा

मथुरा। जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ने कलेक्टेªट सभागार में स्थाई एवं अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल, कान्हा गौशाला, कान्हा उपवन, काजी हाउस, गौ संरक्षण केन्द्र, निराश्रित गौवंश की रक्षा के संबंध में बैठक लेते हुए निर्देश दिये है कि गौशाला एवं ग्राम समाज की जो जमीन खाली पडी हुई है उस पर गौवंश के लिए चारा उगाया जाय। उन्होंने सभी खण्ड विकास अधिकारी एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वह अपने कार्य में तेजी लाते हुए गौवंश के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि समस्त अधिकारी बैठक में प्रस्तुत किये गये आंकडों की जांच स्वयं करें, यदि किसी अधिकारी की रिपोर्ट गलत पायी गयी तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी रामनेवास, ज्वाइंट मजिस्टेªट जग प्रवेश, उप निदेशक पशुपालन डा. एसके मलिक, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. भूदेव सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत सुधीर कुमार सहित अन्य विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे।

15 नवम्बर तक टीनशैड डलवाएं
श्री मिश्र ने शरदऋतु के आगमन को दृष्टिगत रखते हुए सभी संबंधित अधिकारियोंु को निर्देश दिये कि जिन गौशालाओं में टीनशैड नहीं हैं वहां प्रत्येक दशा में 15 नवम्बर तक टीनशैड का निर्माण करा दिया जाय। इसके लिए धनराशि मनरेगा, ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, रायफल निधि एवं अन्य संबंधित से कराई जायेगी। उन्होंने निर्देश दिये कि जनपद में जितने भी गौवंश की ईयर टैगिंग की गई है एवं पंजीकरण किया गया है उन सभी जानवरों की देखभाल करते हुए उनकी संख्या का भी निरंतर निरीक्षण करते रहें।

गौवंश स्थानांतरण के आंकडे स्पष्ट रखे जाएं
जिलाधिकारी ने कहा कि गौशाला से स्थानान्तरित किये गये पशुओं की संख्या स्पष्ट रूप से प्रस्तुत की जाये कि किस गौशाला को कितने पशु स्थानान्तरित किये गये है और उनको चारा हेतु दी जाने वाली धनराशि समय पर उपलब्ध हो। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि अपने कार्य में सुधार नहीं लाये तो उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
श्री मिश्र ने प्रत्येक विकास खण्ड वार बनायी गयी स्थाई एवं अस्थाई गौशालाओं एवं उसमें उपलब्ध सुविधायें तथा जानवरों की संख्या पर विस्तृत जानकारी लेते हुए निर्देश दिये कि प्रत्येक गौशाला में धीरे-2 विस्तार किया जाय और उसमें निराश्रित गौवंश को रखने की क्षमता को बढ़ाया जाय। उन्होंने ऐसे पशुपालकों को भी चिन्हित करने के निर्देश दिये कि जो दूध निकालने के पश्चात अपने पशुओं को खुले में चरने के लिए छोड़ देते हैं।

 

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