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५२ अरब वर्ष एवं 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मानव शरीर मिलता है

५२ अरब वर्ष एवं 84 लाख योनियों में भटकने के बाद मानव शरीर मिलता है। पद्म-पुराण के एक श्लोक में मिलता है, यह श्लोक बताता है की इन 84 लाख योनियों में, 9 लाख जलचर यानि की पानी में रहने वाले जीव-जंतु, 30 लाख पशु, 20 लाख पेड़-पौधे, 11 लाख कीड़े, 10 पक्षी व 4 लाख मानवीय नस्ल है यानि कि कुल 84 योनियां हैं....समझिए हम सब कीड़े, पक्षी, पेड़ पौधे, जीव-जंतु उसके कही बाद हम इस मनुष्य का शरीर धारण कर पाते है.....पर कर क्या रहे है....संतों को देखे तो ज्यादातर राजऋषि के मार्ग पे चल रहे है। ज्ञान कलयुग की जगड़ में है....वैराग दिखावा कर रहा है...भक्ति की आड़ में सभी को गुमराह किया जा रहा है....फिर इस मानव रूपी अमूल्य जीवन को कैसे तारा जाए.....कलयुग का फ़ायदा उठाइए....ये मानव जीवन फिर नही लौटेगा... अच्छे कर्म सद मार्ग दूसरा किसी का अहित न हो...पर एक बड़ी रुकावट है माया जिस से बड़े बड़े ऋषि, संत, देवता, गंधर्व कोई नही बच सकता उसी लिए जीवन में प्रायस करते रहे और संतुलन बनाए रखे....हो सकता है में गलत हूं....पर जीवन को संतुलन का प्रयास ही आपको आपकी मंजिल धरती वाली नही ईश्वर के पास जाने की वहां तक पहुंचने का रास्ता ठीक हो सकता है.....पर हम कर क्या रहे सिर्फ दिखावा और झूठा संसार जो एक स्वप्न है....इस ब्रह्मांड में इतने रहस्य है की अरबों सालों का तप भी कम पड़े......इसलिए मानव रूपी जीवन का सद उपयोग पूरा करें.....बस प्रभु की माया से बचना प्रभु ही जाने कैसे बचा जाए....हरिहर की जय हो

 

नारद संवाद

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