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समाज का एक कड़वा सच

एक कहानी हमारी जुबानी : इस समाज का एक कड़वा सच : एक समाज में कहीं एक मध्यम परिवार रहता था। समाज की सभी कार्य कल्पों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता था। तभी अचानक एक दिन उस पे विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा एक कहावत है ना पहाड़ टूटना...इसलिए लिखा....जिस समाज के लिए दिन रात खड़ा रहने वाला वो परिवार आज गुम हो चुका था उस समाज से...पर तभी एक दिन समाज सभी लोग एक बड़ा कार्यक्रम करने वाले थे...चंदे के लिए उस परिवार के यहां भी गए जो गुम हो चुका था...यानी कि समाज से कट चुका था..जब चंदा लेने उसके घर गए तो उनके घर का मुखिया मिला तो बोले आप हमारे साथ चलिए एक कार्यक्रम करना है...सामाजिक हितों का...तब उस व्यक्ति ने अपनी सारी व्यथा बताई की में बहुत परेशान चल रहा हूं....तब समाज के कुछ लोगों ने उसको मदद का भरोसा दिया पर...जैसे ही घर से निकले वो कभी नहीं आए उसका हाल चाल लेने...तभी कुछ वर्षों बाद उसके यहां ईश्वरीय चमत्कार हुआ..उसके एक बच्चे ने अपनी मेहनत लगन से आईएएस बन गया...तभी वो समाज जो उसे भूल चुका था यहां तक कि उसका कट ऑफ कर दिया था...वो उसके यहां टूट के पड़ा तभी उस व्यक्ति को ख्याल आया कि ये वो ही समाज है जो अब तक मुझे ठुकराता हुआ चल रहा था....उसने उन सब का अभिवादन स्वीकार किया और अपने बेटे को एक सीख दी की बेटे इस समाज के बहुत चेहरे है....ये नए नए रूप में तुम्हारे सामने आएंगे...इसलिए तुम खुद एक समाज हो.... न कि ये लोग.....ये सत्य है इस कहानी का सार ये है कि समाज कुछ नहीं होता जब तक आप कुछ नहीं हो न इसकी परवाह करो न ही इसे पूछो खुद कुछ बनो तो ये तुम से ही समाज शुरू हो जाएगा....वैसे ये समाज आज से नही प्राचीन काल से ऐसा ही है इसने माता सीता पे भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी...????? जय गिरधारी…....गौतम

 

नारद संवाद

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