देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(सुनील शर्मा)। श्रीधाम बरसाना अपनी आराध्य राधारानी के आगमन और स्वागत के लिए सज गया है। लाड़ली महल को जाने के सभी मार्गों से लेकर नगर के सभी मंदिरों एवं आश्रमों को भव्य सजाया गया है। मन्दिरों में मंगल बधाई गायी जा रही है।
17 सितम्बर को वृषभान दुलारी किशोरी के धराधाम पर आगमन दिवस से पूर्व ही श्रीजी के महल से लेकर आने जाने के सभी रास्तों को भव्य विद्युत सजावट से सजाया गया है। वहीं अपनी लाड़ली के स्वागत को ब्रजवासी पलक पांवड़े बिछाकर स्वागत को तैयार हो गये हैं। वहीं नगर में स्थित वृषभानजी मंदिर, दादी बाबा मंदिर, दानगढ़, मानगढ़, विल्सगढ़, मोरकुटी सांखरी खोर स्थित राम मंदिर, जयपुर मंदिर, रंगीली महल में भव्य सजावट की गई है। लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो उनकी सुरक्षा व्यवस्था के साथ सुविधाओं के पूरा जिला प्रशासन जुट गया। नगर में साफ सफाई के विशेष इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों के लिए स्वास्थ्य विभाग नौ जगहों पर स्वास्थ्य शिविर लगाएगा। परिवहन विभाग यातायात के लिए एक सैकड़ा बसों का संचालन करेगा। वहीं पीडब्ल्यू विभाग बरसात में हुईं गड्डायुक्त सड़कों को दुरुस्त कर गड्डामुक्त सड़क कर रहा। बिजली विभाग 15 से 18 तक चार दिन निर्बाध आपूर्ति देने को तैयार है। श्रद्घालुओं एवं वीवीआईपी के वाहनों के पार्किंग को नगर पंचायत ने 13 पाकिंर्ग स्थल बनाये हैं। कुंडों के पानी को स्वच्छ करने को कुंडों में ब्लीचिंग पाउडर डाला गया है। परिक्रमा मार्ग एवं नगर में सभी जगह स्ट्रीट लाइट लगाई गयी है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर जाने के मार्गों को वनवे किया गया है। कुंडों में नावों के साथ गोताखोर तैनात किए गये हैं।
पैतृक गांव में आज जन्मेंगी ललिताजी
द्वापर युग मे अवतरित हुई आल्हादिनी शक्ति राधारानी की सहचरी ललिताजी का जन्मोत्सव राधारानी के आंगन में व उनके पैतृकगांव ऊं चागांव में धूमधाम के साथ आज मनेगा। जिसकी सेवायतों ने सभी तैयारियां कर ली है।
राधा जन्म से पूर्व उनकी प्रधान सखी ललिताजी का जन्मोत्सव राधा रानी के निज महल व उनके पैतृक गांव ऊंचागांव में एवं सुदामा चौक स्थित अष्टसखी मंदिर में शनिवार यानी आज धूमधाम से मनेगा। जिसके लिए भक्तों एवं सेवायतों ने समस्त तैयारी कर ली हैं।
दो जोन और छह सेक्टरों में बंटा बरसाना
श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति राधारानी का जन्म अभेद सुरक्षा में होगा। जिसके लिए 1000 जवानों के साथ दो सैकड़ा अधिकारियों को तैनात किया गया। वहीं श्रद्घालुओं की सुरक्षा को एलआईयू टीम व मेटल डिटेक्टर लगाये गए हैं। समूचे मेला क्षेत्र को दो जोन व छह सेक्टर में बांटा गया है।
16-17 सितम्बर को पुलिस विभाग ने राधा जन्मोत्सव की तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। 1000 संगीनों के साये में 17 सितम्बर की सुबह चार बजे साढ़े पांच बजे तक राधा जन्मोत्सव के अभिषेक दर्शन कराए जाएंगे। सुरक्षा की दृष्टि से नगर को दो जोन व छह सेक्टर में बात दिया है। प्रत्येक सेक्टर का इंचार्ज डीएसपी स्तर का अधिकारी व एसडीएम होंगे।
आज रात से होंगी बरसाना की सीमा सील
राधाष्टमी मेला को शुक्रवार को एडीएम प्रशासन आदित्य प्रकाश ने फाइनल टच देते हुए मेला स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान एडीएम ने कुंडों में स्नान पर प्रतिबंद लगा दिया है।
पांच किलोमीटर पैदल चल बरसाना पहुंचेंगे श्रद्धालु
बृषभानु दुलारी के जन्मोत्सव की तैयारियों को लेकर शनिवार शाम से ही बरसाना की सीमा सील कर दी जाएगी। रात्रि दस बजे से बड़े वाहनों को सम्बन्धित पाकिंर्ग स्थल पर बैरियर लगाकर रोक दिया जाएगा। इस दौरान कोसी से आने वाले बड़े वाहनों संकेत गांव के पास, छोटे वाहनों को गाजीपुर व राणा की बगीची पर स्थित राधे राधे कालोनी में, छाता से आने वाले बड़े वाहनों को श्रीनगर मोड़ पर, छोटे वाहनों को गैस एजेंसी के पास, कांमा से आने वाले वाहनों को राधा बाग पर, गोवर्धन से आने वाले बड़े वाहनों को क्रेशर के पास तथा छोटे वाहनों को गोवर्धन ड्रेन के समीप रोका जाएगा। इस दौरान प्रशासन ने छाता से करहला रोड होते हुए वाईपास भी बनाया है। इस बार पन्द्रह पाकिंर्ग स्थल व तीस बैरियर मेला क्षेत्र में लगाये गए है।
रावल में जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़
यमुना किनारे स्थित राधारानी के गांव रावल में राधाष्टमी पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। सुबह चार बजे के अभिषेक और आरती में पहुंचने के लिए श्रद्धालु मन्न्तें मांगते हैं। राधारानी मंदिर के पीछे छत पर एक करील का पेड़ है जिसे आज भी राधारानी का ही प्रतीक माना जाता है। मंदिर के सामने स्थित वाटिका में भी रहस्यमय दो पेड़े आपस में जुड़े हैं जिनके रंग भी सफेद और काले हैं। श्रद्धालु इन दोनों पेड़ों को भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी का प्रतीक मानते हैं।
फोटो-15यूपीएच मथुरा05
वित्र परिचय-रावल स्थित राधारानी का रमणीय वातावरण में स्थित मंदिर।
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