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बरसात के पानी से धराशाई होने लगे मकान

दो गांवों में सात मकान गिरे, प्रशासन नहीं कर रहा कोई मदद मथुरा(सतपाल सिंह)। पिछले कई दिन से हो रही लगातार तेज बरसात के पानी से दो गांवों में सात मकान धराशाई हो गए हैं। कई मकानों में दरारें भी आ गई हैं। गांव रैपुराजाट में उफनाई पोखर का पानी खेतों और गलियों में घुसा हुआ है। इससे मकानों की नींव कमजोर हो रही है।
गांव शहजादपुर में सिंधी पुत्र निबोरी का एक कमरा बारिश की वजह से गिर गया। तोता पुत्र भोलू का कच्चा मकान धराशायी हो गया है। कप्तान पुत्र अब्बू की मिट्टी और टिनशेड से बनी झोपड़ी गिर गई है। सुरेश पुत्र रामचरन का कच्ची मिट्टी से बना बरामदा बारिश ने ढहा दिया है। इसी तरह मोटो पत्नी दीवान सिंह का कमरा और लाखन सिंह का बरामदा गिरा है।
तेज बारिश का पानी रैपुरा जाट में भरत पुत्र हवलदार के मकान की नींव में घुसता रहा और दोपहर को पूरा मकान गिर गया। इसमें रखा सामान और पशुओं का भूसा पानी में बह गया। यहां राधेश्याम, रत्न, रमेश आदि के मकानों में भी दरारें पड़ गई हैं।
गांव की पोखर के पानी का निकास न होने के कारण यह गलियों और घरों में घुस रहा है। प्रधान नंदकिशोर ने बताया कि अधिक वर्षा होने की वजह से पोखर उफन रही है और खेतों और गलियों में पानी भर गया है। ग्रामीणों के मकान कमजोर होकर गिर रहे हैं। इतना ही नहीं सौंख क्षेत्र के गांवों में भी मकानों के गिरने की सूचनाएं आ रही है।
 
दो गांवों में सात मकान गिरे, प्रशासन नहीं कर रहा कोई मदद बरसात से मकान ढहने से घर से बेघर हुआ गरीब
शुक्रवार को तड़के बरसात से बलदेव के गांव बुर्ज सुखदेव भाग अकोस में एक कच्चा मकान ढहने से गरीब किसान घर से बेघर हो गया। मकान के अचानक गिर जाने से सुखदेव बुर्ज के कारे सिंह के सामने अब खाना बनाने तक कि कोई जगह नहीं बची है। ग्रामीण चार बच्चों के साथ खुले में रात गुजारने को मजबूर हैं। इधर स्थानीय लोगों ने प्रशाषन से ग्रामीण की आर्थिक मदद की मांग उठाई है।
 
तालाब, पोखरों पर नहीं हटे अवैध कब्जे
जिला प्रशासन के समाधान दिवस में सबसे ज्यादा शिकायतें तालब, पोखारों से कब्जे हटवाने की आ रही हैं। जिला प्रशासन लगातार इस बात के दावे भी कर रहा है। बरसात ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। पोखर तालाबों पर कब्जा हो जाने की वजह से गावों में पानी उफन कर गलियों में पहुंच रहा है। 
 
गढ़ी रूपा से पलायन कर गये ग्रामीण
राया ब्लॉक के गांव गढ़ी रूपा से सभी ग्रामीण गांव को खाली कर चले गये हैं। गाव चारों ओर से पानी से घिरा है। हालत यह है कि गांव को राया मथुरा मार्ग से जुड़ने संपर्क मार्ग पूरी तरह पानी में डूब गया है। 
 
 

नारद संवाद

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