देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा(पवन शर्मा)। जहां एक ओर देश आजादी के जश्न में डूबा है वहीं दूसरी ओर देश की सीमाओं की रक्षा की खातिर बलिदान देने वाले शहीद पुष्पेन्द्र का पार्थिव शरीर उसके गांव पहुंचेगा। शहीद होने की खबर जिसने भी सुनी है वह नगला खुटिया पहुंच गये हैं। शहीद के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उसके पिता तेज सिंह की आंखें तो पुत्र के वियोग में पथरा गई हैं जिस पुत्र को मेहनत मजदूरी करके पढ़ा लिखा करके देश की सेवा करने के लिए भेजा है वह आज उनके बीच अब नहीं है। वह पूरे घर का पालनहार था। बीते दिन पाक की नापाक हरकत को नाकामयाब करने के दौरान नगला खुटिया का रहने वाले 27 वर्षीय पुष्पेन्द्र आतंकवादियों की गोली का शिकार हुआ हुआ। बताया गया कि उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टंगधार सैक्टर में एलओसी की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करने के दौरान पुष्पेन्द्र शहीद हो गये। पुष्पेन्द्र की शहादत की खबर बीती रात्रि मिली थी। पुष्पेन्द्र वर्ष 2011 में सेना में भर्ती हुए थे। 27 साल के पुष्पेन्द्र सिंह का विवाह 17 फरवरी 2016 आगरा के गांव जोनई निवासी सुधा के साथ हुआ था। दो माह पूर्व ही घर से छुट्टी समाप्त कर ड्यूटी पर पहुंचे थे। मंगलवार की शाम तक शहीद के पार्थिव शरीर का पूरा गांव इंतजार करता दिखाई दिया। प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिधि भी शहीद के परिवार को सात्वंना देने पहुंचे।













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