देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मुड़िया पूर्णिमा मेला को लेकर निरंतर बढ़ रहा है श्रद्धालुओं का सैलाब
मुडिय़ा मेला में बुधवार को भगवान इन्द्रदेव की मेहरबानी ने श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ा दिया। गिरिराज दानघाटी से परिक्रमा मत्था टेककर जैसे ही रेला आगे बढ़ा तो गिरिराज महाराज के उद्घोष के साथ तलहटी गुंजायमान हो गई और चारों तरफ सिर ही सिर दिखाई देने लगे। यूं तो परिक्रमा करने देश के कोने कोने से श्रद्धालु अपने साथियों के साथ एवं परिवार को लेकर गिरिराज महाराज की शरण में पहुंच रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से अधिकारी परिक्रमार्थियों को किसी प्रकार का कोई कष्ट न पहुंचे इसके लिए प्रयासरत हैं। 21 किमी. में फैले विशाल गिरिराज पर्वत की परिक्रमा शाम होते ही जनसमुद्र का रूप धारण कर लेती है। मुडिय़ा मेला के तीसरे दिन देखते ही देखते भीड़ का सैलाब आस्था के समंदर में डुबकी लगाने लगा। परिक्रमा मार्ग हो या रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड सभी जगह श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आ रही है। परिक्रमार्थियों का उत्साह भी कम नहीं हो रहा है। गिरिराज धाम आने वाले श्रद्धालु परेशानी की परवाह किये बगैर वाहनों से उतरकर कई कोस पहले ही पैदल चलकर पहुंच रहे हैं। रिक्शा व अन्य वाहनों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गिरिराज धाम के सैलाब की भीड़ मथुरा जंक्शन के बाद मथुरा बाईपास चौराहे से सतोहा, खामिनी अड़ीग से गोवर्धन, छटीकरा से राल, जल्हेंदी बसोंती राधाकुंड, डीग से बहज, गांठौली, जाजम पट्टी से सौंख पैंठा, महमदपुर, बरसाना रोड से पलसों, नीमगांव तक भीड़ ही भीड़ दिखाई दे रही है। अलवर-मथुरा रेलवे मार्ग के गोवर्धन व राधाकुंड रेलवे स्टेशन पर भीड़ ही भीड़ दिखाई दे रही है। श्रद्धालुओं का जत्था परिक्रमा भीड़ में शामिल होता है और गिरिराज महाराज की परिक्रमा करके वापिस लौट जाता है। मुडिय़ा मेला में भीड़ का आवागमन बना हुआ है। श्रद्धालु गिरिराज जी की परिक्रमा करने के बाद मानसी गंगा के फुब्बारों के नीचे स्नान कर रहे हैं। गिरिराज महाराज पर दूध चढ़ाया जा रहा है। मुडिय़ा मेला में टनों दूध चढ़ चुका है। मेला का कंट्रोल प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। खोया-पाया कैंपों में अपनों के बिछुड़ गये लोगों को मिलाया जा रहा है। मुडिय़ा मेला में एक ओर जहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है वहीं दूसरी ओर सेवा करने वाले भक्त पीछे नहीं है। जगह-जगह भंडारे व सेवा शिविरों का आयोजन माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। गोवर्धन के प्रमुख मंदिरों में आधुनिक सजावट की गई है। मानसी गंगा मुकुट मुखारविंद मंदिर में झिलमिलाती रोशनी और नाव में चल रहे फुब्बारे के अभिनव दर्शन श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। गिरिराज जी की परिक्रमा के गोवर्धन के अलावा राधाकुंड, आन्यौर, जतीपुरा व पूंछरी में धार्मिक आयोजन किये जा रहे हैं।













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