देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read More
300 बंदर पकड़कर जंगल में छोड़ने पर लाखों का खर्चा उठा रही संस्था
वृंदावन। नगर में उत्पाती बंदरों से निजात दिलाने को जी तोड़ कोशिश में लगे एमआरसी वृंदा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. अभिषेक शर्मा का दर्द शुक्रवार दोपहर को उस समय छलक पड़ा जब वह सुनरख मार्ग स्थित लोटस गार्डन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी वृंदावन में जहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं दूसरी ओर बंदरों के आतंक की दास्तां भी किसी से छिपी नहीं है। आए दिन बंदर लोगों को काट लेते हैं उनके चश्मा, पर्स, मोबाइल आदि छीन कर ले जाते हैं। श्रद्धालुओं को आए दिन इन परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं नगर में बंदरों के हमले में एक दर्जन के करीब लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। डॉ. अभिषेक शर्मा ने बताया कि संस्था को प्रथम चरण में वन विभाग द्वारा 300 बंदर पकड़कर जंगल में छोड़ने की अनुमति प्रदान की गई थी जिसके लिए संस्था को कोई आर्थिक सहायता ना तो वन विभाग से मिली और ना ही नगर निगम ने इस ओर कोई कदम बढ़ाया। कुल मिलाकर संस्था को लोकल स्तर पर 31,700 रुपए की राशि मिल पाई है। उन्होनें स्थानीय स्तर पर किस व्यक्ति से कितना पैसा मिला यह भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बंदर पकड़ने के प्रोजेक्ट में ढाई लाख रूपय खर्चा हुआ है, जो हमने अपनी निजी आय से दिया है धर्म रक्षा संघ के अध्यक्ष सौरभ गौड़ व आचार्य बद्रीश के साथ नगर वासियों ने डॉ.अभिषेक शर्मा के कार्य की प्रशंसा की है। उनका कहना है कि विगत काफी वर्षों से नगर में बंदरों की विकराल समस्या है सभी ने प्रयास को कदम बढ़ाए हैं। लेकिन इस को अमलीजामा आज तक कोई नहीं पहना सका यह सब एमआरसी वंृदा ने कर दिखाया। कार्यक्रम में आकाश गोस्वामी, डॉ.नितिन गोयल, आशीष वशिष्ठ, रमन गौतम, डॉ. तपस्या शर्मा. मौजूद रहे।













Related Items
तमिलनाडु में भारी बारिश, मौसम विभाग ने 11 जिलों में जारी किया ऑरेंज अलर्ट
विद्युत विभाग के खिलाफ होलीगेट पर दिया धरना
सीमा शुल्क विभाग ने कोलकाता में कार के बोनट से 2.5 करोड़ रुपये का तस्करी का सोना किया जब्त