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विद्युत विभाग के सभी कार्यालय पर जड़ा ताला

निजी कंपनियों के हाथ में आ जाने पर विद्युत विभाग के कर्मचारी एवं अधिकारी पूर्णतः हड़ताल पर निजीकरण के फैसले से गुस्साएं विद्युत अधिकारी-कर्मचारियों ने किया कार्य बहिष्कार 

प्रदेश व्यापी अभियान के तहत मथुरा में दिखा असर 

मथुरा,। प्रदेश के पांच जनपदों की विद्युत सप्लाई का निजीकरण को लेका सरकार के फैसले से क्षुब्ध आज प्रदेशभर के ऊर्जा निगमों के साथ दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अधिकारी और कर्मचारियों ने भी कार्य बहिष्कार किया हैं। कैंट बिजली घर पर काफी संख्या में उपभोक्ता अपना बिल जमा कराने के लिए भटकते रहे। कर्मचारियों ने सुबह से ही सभी कार्यालयों-बिल जमा काउण्टरों पर ताले जड दिये थे। 

निजीकरण किये जाने के फैसले से गुस्साये मथुरा के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार किया। सभी कार्मिक प्रातः 09 बजे अपने-ंअपने कार्यालयों पर एकत्रित हुये। एकत्रित होकर उन्होंने ‘‘निजीकरण नहीं चलेगा, निजीकरण बन्द करो, निजीकरण हो बर्बाद‘‘ आदि नारे लगाये गये। कार्यालयों से साथी छोटे-ंछोटे जत्थों में मथुरा कैन्ट स्थित धरने स्थल पर पहुॅचे। जहाॅ पर घूम-घूमकर नारे लगाये। इसके पश्चात् मथुरा कैन्ट पर सभी कार्मिकों व अधिकारियों द्वारा विरोध सभा कर नारेबाजी की, इस सभा में मथुरा जनपद के लगभग 1500 विद्युत कार्मिकों ने भागीदारी की। सभी ने यह चेतावनी दी कि यदि प्रदेश सरकार विद्युत वितरण के निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेती तो बिजली कर्मचारियों एवं अभियन्ताओं को अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लेने के लिये बाध्य होना पड़ेगा। वक्ताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, योगी आदित्यनाथ से निजीकरण के फैसले पर पुनः विचार करने की अपील करते हुये कहा कि प्रदेश की विद्युत व्यवस्था के बारे में ऊर्जा विभाग के आला अधिकारी प्रदेश सरकार को गुमराह कर रहे हैं, अन्यथा बिजली व्यवस्था में हो रहे सुधार के बावजूद, प्रदेश सरकार निजीकरण का निर्णय न लेती। यह भी माॅग की गयी कि सात अन्य जनपदों रायबरेली, मऊ, बलिया, कन्नौज, इटावा, उरई और सहारनपुर के निजीकरण के फैसले को तत्काल वापस लिया जाना चाहिये। संघर्ष समिति का यह आन्दोलन इस सभी जनपदों एवं पाॅचों शहर के निजीकरण की वापसी तक चलता रहेगा।

सभा की अध्यक्षता ई. सुबोध शर्मा द्वारा की गयी एवं संचालन ई सचिन द्विवेदी द्वारा किया गया। सभा में अधीक्षण अभियन्ता इ. राघवेन्द्र, ई. बी.एस. गंगवार, ई. राजीव शर्मा, अधिशासी अभियन्ता ई. ए.के. पाण्डेय, ई. कुलदीप कुलश्रेष्ठ, ई. राजीव कालरा, ई. महेन्द्र कुमार, ई. राजवीर, ई. वीरेन्द्र, उपखण्ड अधिकारी ई. सचिन कुमार शर्मा, ई. वी.पी.एस. चैहान, ई. विकास शर्मा, ई. शीतल प्रसाद, ई. हाकिम सिंह, ई. आर.के. पाण्डेय, ई. पुनीत जैन, लेखाकार, एस.एन. अरोड़ा, राजीव सिंह, विजय कुमार, साक्षी चैधरी, नवीन उपमन्यु, सनी कुमार आदि ने सम्बोधित किया। 

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