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परिवहन क्षेत्र भी निजी निवेश के लिए खोला गया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को 6 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) की घोषणा की, जिसमें बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निजी कंपनियों को शामिल करके कुशलता बढ़ाने के साथ साथ धनौपार्जन एक उद्देश्य है। इस परियोजना में यात्री ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों से लेकर हवाई अड्डों, सड़कों और स्टेडियमों तक का मुद्रीकरण शामिल है। कुछ लोग इसे सरकारी संपत्ति को बेचना बोल रहे हैं जबकि वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि इन संपत्तियों का मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा।

क्या अधिकार होगा निजी क्षेत्र के पास

योजना के तहत, निजी कंपनियां इनविट रूट का उपयोग करके एक निश्चित रिटर्न के लिए परियोजनाओं में निवेश कर सकती हैं और साथ ही सरकारी एजेंसी को वापस करने से पहले एक निश्चित अवधि के लिए परिसंपत्तियों का संचालन और विकास कर सकती हैं। गोदामों और स्टेडियमों जैसी कुछ संपत्तियां भी संचालन के लिए लंबी अवधि के पट्टे पर दी जाएंगी हैं।

परिवहन क्षेत्र भी निजी निवेश के लिए खोला गया

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 25 हवाईअड्डे, जिनमें चेन्नई, भोपाल, वाराणसी और वडोदरा में हवाईअड्डे शामिल हैं, साथ ही 40 रेलवे स्टेशन को निजी निवेश प्राप्त करने के लिए खोला गया है। इसके अलावा कुछ प्रमुख राजमार्गों को भी पत्ते पर दिया जा सकेगा

एयर इंडिया के घाटे से लेंगे सबक

मई 2014 में एयर इंडिया की नेटवर्थ लगभग 50-51 हजार करोड़ थी और उस पर लगभग 53-54 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। हर वर्ष उसे लगभग 5.5 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था और यह घाटा सरकार के ऊपर आर्थिक बोझ को बढ़ाता रहा है। घाटे में जा रही सरकारी एजेंसी की हिस्सेदारी को पहले की सरकारें भी निजी क्षेत्र को सौपतीं रही है। 2014 से पहले तक देश के 4 सबसे बड़े हवाई अड्डों की बड़ी हिस्सेदारी देशी-विदेशी कंपनियों को सौपीं जा चुकी थी।

दिल्ली एयरपोर्ट की हिस्सेदारी

मई 2014 में दिल्ली एयरपोर्ट में जीएमआर ग्रुप की हिस्सेदारी 64%, फ्रापोर्ट एजी की हिस्सेदारी 10% थी। यानि कुल 74% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के पास थी, जो 2006 में ही दी जा चुकी थी। केवल 26% हिस्सेदारी भारत सरकार के पास अर्थात एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पास थी।

मुंबई एयरपोर्ट की हिस्सेदारी

मई 2014 में मुम्बई एयरपोर्ट की कुल 74% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के पास ही थी। उसे यह हिस्सेदारी 2006 में ही सौपीं जा चुकी थी। केवल 26% हिस्सेदारी भारत सरकार के पास अर्थात एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (AAI) के पास थी। पिछले वर्ष सितंबर मेँ अडानी कंपनी ने जो 74% हिस्सेदारी खरीदी है वो हिस्सेदारी उसने उस जीवीके ग्रुप, बिडवेस्ट कम्पनी और एयरपोर्ट कम्पनी ऑफ साऊथ अफ्रीका से ही ली है।

हैदराबाद एयरपोर्ट की हिस्सेदारी

मई 2014 में हैदराबाद एयरपोर्ट में जीएमआर ग्रुप की हिस्सेदारी 63%, मलेशिया एयरपोर्ट होल्डिंग्स की हिस्सेदारी 11% थी। यानि कुल 74% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के पास थी। उसे यह हिस्सेदारी सरकार दिसंबर 2004 में ही दे चुकी थी। अर्थात केवल 26% हिस्सेदारी भारत सरकार के पास थी जिसमें से 13% हिस्सेदारी अब तेलंगाना सरकार के पास है।

बैंगलोर एयरपोर्ट की हिस्सेदारी

मई 2014 मेँ बंगलौर एयरपोर्ट में जीवीके ग्रुप की हिस्सेदारी 43%, सीमेंस प्रोजेक्ट वेंचर्स की हिस्सेदारी 26%, तथा फ्लूगाफेन ज्यूरिख एजी लिमिटेड की हिस्सेदारी 5% थी। यानि कुल 74% हिस्सेदारी निजी क्षेत्र के पास थी। उसे यह हिस्सेदारी सरकार जुलाई 2004 में ही सौंप चुकी थी। केवल 26% हिस्सेदारी भारत सरकार के पास अर्थात एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (AAI) के पास बची थी।

नारद संवाद

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