देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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सरकार का काम रोजगार देने का है रोजगार छीनने का नहीं
ब्रजवासियों की पूजा से ही ठाकुर जी का स्वरूप है
मथुरा। गोवर्धन कस्बे में राष्ट्र के प्रमुख अखाड़ा परिषदों में शामिल पंचरामानंदीय अखाड़े गोवर्धन में आयोजित ब्रज के संत गणेश दास भक्तमाली महाराज के जन्म शताब्दी महोत्सव में जुटे देशभर के संतों ने उत्तर प्रदेश सरकार के श्राइन बोर्ड का गठन कर मंदिरों के अधिग्रहण का विरोध किया है। महोत्सव में उ.प्र. के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश व अन्य धार्मिक स्थलों से संत पहुंच रहे हैं। महोत्सव में आयोजित पत्रकार वार्ता में जगद्गुरू द्वाराचार्य मलूक पीठाधीश्वर संत राजेन्द्र दास महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण काल से लेकर अब तक ब्रज की संस्कृति व सभ्यता, उत्सव व महोत्सव आदि को ब्रजवासियों ने बचाकर रखा है। संतों का आदर सत्कार भी ब्रजवासियों ने ही किया है। परंपरा से ही ब्रजवासी विप्र देवालयों में गिरिराजजी व यमुना जी की पूजा करते आ रहे हैं। सरकार अगर विप्रों के हकों को छीनने की बात करती है तो संत इसका विरोध करते हैं और पूरे देश के संतों का मत भी यही है। पीपा पीठाधीश्वर झालावाड़ से आये झनकेश्वर दास त्यागीजी महाराज ने कहा कि सरकार गोवर्धन के ब्राह्मणों का हक नहीं छीन सकती है। अगर ऐसा कर रही है तो यह एक अच्छे शासन का काम नहीं है। संत रघुवीर दास महाराज ने कहा कि अगर सरकार को मंदिरों का अधिग्रहण करना है तो पहले विप्र बंधुओं व संतों विरोध को झेलने के लिए तैयार हो जाए और सरकार इनके विरोध को कभी भी नहीं झेल सकती है। गलताजी धाम जयपुर से आये संत सियाराम दास जी महाराज ने कहा कि सरकार रोजगार दे नहीं सकती है तो छीन भी नहीं सकती है। धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग दास जी महाराज ने कहा कि सरकार पहले अपने मठों का अधिग्रहण करे इसके बाद ब्रज के मंदिरों की तरफ आकर उनको अधिग्रहण करने की बात करे। हरीशंकर वेदांत महाराज ने कहा कि मंदिरों से विप्रों के परिवारों का पालन-पोषण होता है। अगर प्रजातंत्र प्रजा की रक्षा न करके उनके अधिकारों को छीनेगा तो संत एकजुट होकर उनके साथ होंगे। राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विभाग के विभागाध्यक्ष संत सीताराम दास महाराज ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को नहीं मालुम की हिन्दुओं के पवित्र स्थलों की पंरपरा से खिलवाड़ करने का क्या अंजाम होगा। पंचरामानंदीय अखाड़ा परिषद गोवर्धन के अध्यक्ष अशोक नारायण दास महाराज ने कहा कि निर्वाणी अखाड़े के संत गोवर्धन के सेवायतों के साथ हैं। उनके मंदिरों के अधिग्रहण नहीं होने देंगे।













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