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चर्चित महराना कांड में 30 लोग काट रहे आजीवन कारावास की सजा
जीवन के अंतिम पड़ाव में सजा काट रहे सात कैदियों की हालत दयनीय
मथुरा। बहुचर्चित महराना कांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक वृद्ध कैदी की बीमारी से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार मार्च 1991 में एक दलित युवक और सर्वण जाति की युवती के प्रेम प्रसंग को लेकर उस समय गांव के लोगों ने सरेआम युवक और युवती को फांसी पर लटका दिया था। यह घटना जिले ही नहीं पूरे प्रदेश में चर्चित होने के बाद पुलिस ने इसकी रिपोर्ट दर्ज की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान रिपोर्ट में नामजद थाना बरसाना के गांव महराना के 8 लोगों को फांसी और 22 लोगों को वर्ष 2011 के नवंबर माह में आजीवन कारावास की सजा सुनायी गई थी। बाद में उच्च न्यायालय ने 8 लोगों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। उसी समय से जेल में बंद 60 वर्षीय गोपी पुत्र हरिओम निवासी महराना बीमार हुआ तो कारागार प्रशासन ने उसे उपचार के लिए जेल अस्पताल में भर्ती कराया था,वहां हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल के लिए शुक्रवार सुबह 10 बजे रैफर कर दिया गया,जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मृत कैदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसकी जानकारी होने पर मृतक के परिजन एंव ग्रामीण पोस्टमार्टमगृह पहुंच गए। पोस्टमार्टमगृह पर आए महराना निवासी श्याम सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में पुलिस ने गलत तरीके से लोगों के नाम रिपोर्ट दर्ज की थी,उनका कहना था कि घटना के समय मृत कैदी गोपी होडल में रहते थे,उनका कोई लेना-देना नहीं था। उनका कहना था कि इस प्रकरण में दोषी ठहराए लोगों में से 82 वर्षीय मन्नी पुत्र नत्थी,92 वर्षीय दीपी पुत्र नत्थी,80 वर्षीय दयाराम पुत्र भंवर सिंह,82 वर्षीय चतर सिंह पुत्र लाल सिंह,85 वर्षीय मंगतू पुत्र सुंदरलाल,78 वर्षीय लाल सिंह पुत्र खुशीराम और 75 वर्षीय प्रीतम सिंह पुत्र नवल सिंह की हालत दयनीय बनी हुई है।













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