देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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बाबा जयगुरूदेव के वचनों को सुन श्रद्धालुओं हुए भावविभोर
मथुरा। जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे हैं 69 वें वार्षिक भण्डारा सत्संग -मेला के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। राष्ट्रीय उपदेशक बाबूराम और सतीशचन्द्र ने श्रद्धालुओं को बाबा जयगुरुदेव के वचनों का स्मरण कराया। बाबूराम ने रामचरित मानस की पंक्ति को उद्धृत करते हुये कहा कलयुग योग यज्ञ नहीं ज्ञाना, कलियुग केवल नाम अधारा। कलियुग में नाम यानि शब्द की महिमा है। त्रेता, द्वापर के युगों की साधना अलग थी। अब उन युगों की साधना से जीव को जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलेगा। किताबों में जो नाम है वह वर्णात्मक है। वर्णात्मक नाम से जीवों को जन्म-मरण से छुटकारा नहीं मिलता है। जन्म-मरण से छुटकारा धुनात्मक नाम से मिलता है। ये धुनात्मक नाम वक्त के महापुरुषों के पास होता है। उनके पास जाना पडे़गा। जब वे नाम से परिचय करा देंगे तो ईष्वर के मुख से निरन्तर आ रही आसमानी आवाज को मनुष्य शरीर में जीवात्मा के कान से सुन सकेंगे। चैरासी के बन्धन से छुटकारा मिल जायेगा।
मन्दिर में पूजन प्रारम्भ हो गया। पूजन के लिये महिला व पुरुष की अलग-अलग कतारें हैं। जयगुरुदेव मन्दिर में पूज्यपाद स्वामी घूरेलाल लाल जी महाराज (दादा गुरु) का पूजन करने के बाद बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के समाधि स्थल पर पूजन की व्यवस्था की गई है। लोगो के आने का क्रम जारी है।













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