देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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नगर कें सप्त देवालयों के अलावा इस्काॅन मंदिर में हुआ गोर्वधन पूजन
मथुरा। वृन्दावन आस्था की नगरी वृन्दावन मंे शुक्रवार को गोर्वधन पूजन की धूम रही। प्रातः काल से ही मंदिर देवालयों में गोर्वधन पूजन करने को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा। मंदिरों की नगरी गिर्राज महाराज के जयकारों से गुंजाएमान हो उठी। नगर के मंदिरांें में श्रद्धा भाव के साथ विधि विधान पूर्वक गोर्वधन पूजा की गयी। वहीं विश्वविख्यात इस्काॅन मन्दिर में घण्टे घड़यालों के मध्य श्रद्धालुओं ने गोर्वधन महाराज की पूजा अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया। गोर्वधन पूजन को विदेशी भक्त भी लालायित दिखे। विदेश भक्तों पर गिर्राज धरण का ऐसा रंग च-सजय़ा के हर कोई गिर्राज प्रभु की आस्था में विलीन नजर आया। भक्तों द्वारा हरिनाम संर्कीतन कर गोर्वधन पूजन एवं अन्नकूट का अनन्द लिया। प्रातकाल से ही इस्काॅन मन्दिर मेें गोर्वधन पूजन की तैयारियों को लेकर श्रद्धालु उत्सुक दिखाई दिये। सम्पूर्ण मंदिर परिशर में प्रभु के उदघोषों से गुंजने लगा। इस्काॅन मंदिर में दोपहर बाद तक गोर्वधन पूजन को विदेश भक्तों
का सैलाब उमड़ता रहा। श्रद्धालु भक्तों ने गोर्वधन पूजन कर शुख स्मृद्धि एवं प्रकृति की रक्षा के लिये कामना की। महन्त प्रेमदास
शास्त्री महाराज ने गोर्वधन पूजन के एवं अन्नकूट के महत्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इन्द्र की
पूजा बन्द करके विष्णु स्वरूप गोर्वधन पर्वत की पूजा प्रारम्भ की। गोर्वधन महाराज आज भी भक्तों द्वारा मांगी गयी मनोकामनाऐं पूरी करतें हैं। इसके साथ ही राधारमण जी,राधाबल्लभ जी, मदनमोहन जी के अलावा नगर अन्य मंदिरों में भी श्रद्धाभाव के साथ गोर्वधन पूजन एवं अन्नकूट का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंचगौड़ा दास, परमदास, रवि लोचन दास, जर्नादन महाराज, भक्ती माधुर महाराज, खुशा, हंसराज, मुकुन्दा प्रभु, संटींग के अलावा बड़ी संख्या में विदेशी भक्त मौजूद रहे।













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