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परशुराम ने फरसे के प्रहार से बनाया शिव मन्दिर

यात्रा पार्ट ८ : ईश्वर ने मुझे अपने #चरणों के दर्शन कहू तो बहुत कराएं है। में #नाथद्वारे अक्सर जाता रहा हु। इस बार यात्रा उस वीर की भूमि पे थी। जो #मेवाड़ की शान #महाराणा #प्रताप की है। वहां हमारे सबके राम #परशुराम जी की धरा भी है। #राजस्थान राज्य की #अरावली #पर्वतमाला के मध्य स्थान में पुर्ण रुप से प्राकर्तिक बना हैं, #अमरनाथ कहा जाने वाला परशुराम महादेव मंदिर। माना जाता हैं की "‘परशुराम‘ ने फरसे के प्रहार से बनाया शिव #मन्दिर"। #परशुराम जी लाखो साल पहले त्रेता युग में मंदिर में बनी गुफा के रास्ते से यहाँ आये थे। यहाँ बैठकर #भगवान शिव की गुप्त आराधना की। भगवान #शिव को प्रसन्न करके उन्होनें #अर्मतत्व का वरदान और इसके साथ ही कई दिव्यास्त्र एवं अस्त्र-शस्त्र भी प्राप्त किए। फरसे को भी यही से प्राप्त किया। आगे चलकर इस #मंदिर का नाम #परशुराम महादेव मन्दिर पड़ गया। उन्होनें जगह-जगह तप किया पर उनको अपने #गुरु शिव के #दर्शन नहीं हुए। #ऋषि-#मुनियों ने बताया की उन्हें #मातृहत्या का अपराध है। तो ऋषि-मुनियों के कहने पर मातृ हत्या के दोष के निवारण के लिए यहाँ आये।ऋषि-मुनियों के अनुसार उनको अरावली पवर्तमालाओ मातृकुंडया नदी #राजस्थान के #चितौड़गढ़ जिले मे स्नान करके शिव की आराधना करनी थी। तो वो स्नान करके #गुफा के रास्ते आये थे। कुदरत ने अब #गुफा बंद करदी। अब गुफा 180 किलोमीटर लम्बी गुफा जिसका दुसरा छोर नदी पर था। अब मात्र 5-7 मीटर तक अन्दर जा सकते हैं। 
जंगलों से होते हुए बड़े दुर्लभ #पहाड़ का सफर तय करना पड़ता है। उस समय में अपने खुद के साथ  ट्रैकर के कुछ महारथियों के साथ जाता था। बड़ी मजेदार बात ये थी कि कई किलोमीटर यात्रा के बाद जब दर्शन हुए तो हम सब अचंभित हुए क्योंकि दर्शन से लौट ते वक्त सबने तय किया हम जंगल के रास्ते जैन के प्राचीन मंदिर है वहां। उधर निकल लेंगे पर तभी एक साधु मिले उन्होंने टीम के एक मेम्बर को उसके नाम से आवाज लगाई इधर आओ कर्मवीर उसका नाम लेके बुलाया खेर सबको अजीब लगा पर मेने #बद्रीनाथ की #यात्रा में ऐसे कई साधुओं से भेट हुई थी। इसलिए कोई ज्यादा फर्क नही पड़ा सबने अपना अपना भविष्य जानना चाहा। खेर सबके बाद उन्होंने मुझे मेरे नाम से आवाज लगाई खेर #साधु का सम्मान करते हुए में आगे बढ़ा तो बोले तुझे अभी एक लंबी यात्रा करनी है। कुछ ही समय के बाद में बोला वो तो में अक्सर करता हु। पर बोले इस यात्रा के खत्म होते ही वो शुरू होगी। खेर बात सही निकली में देव भूमि उत्तराखंड की #यात्रा के लिए निकल गया। आज तक सोचता हु लोग अगर भविष्य देखना जानते है। तो बहुत प्रकृति की होने वाली #घटना को रोक सकते है। फिर जब #पुराणों का अध्यन किया तो पता लगा की हम सृष्टि की किसी भी गति को नहीं रोक सकते क्योंकि ये अनुचित है। आगे और भी यात्राओं का वरण करूंगा...... हर हर महादेव

नारद संवाद

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