देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
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मथुरा। गोवर्धन के श्रीधाम राधाकुण्ड में अहोई अष्टमी स्नान अर्द्ध रात्रि के पर्व लेने के लिये निसंतान दम्पतियों का जन सैलाव सुवह से ही राधारानी कुण्ड पर उमडता रहा। अहोई अष्टमी स्नान करने से पूर्व राधारानी कुण्ड पर महिला श्रद्धालु भक्तों ने अहोई माता की पूजा अर्चना की। और इन्तजार था तो केवल श्रद्धालुओं को उस घडी का जिस घडी में श्री राधारानी की कृपा से निसंतान दम्पत्तियों को अर्द्ध रात्रि स्नान कर पर्व लेने का। कुण्ड के घाटों पर शाही स्नान की अर्द्ध रात्रि देशी बिदेशी व बंगाली श्रद्धालु भक्तों की भीड लाखों की संख्या में दिखाई दी। अहोई अष्टमी स्नान राधारानी कुण्ड में सन्तान प्राप्ती एवं दीर्घ आयु के लिये किया जाता है। कार्तिक मास की अष्टमी को अहोई अष्टमी कहा गया है। और इस दिन महिला श्रद्धालु भक्त निर्जला व्रत रखकर सायं करीव चार बजे के बाद राधारानी कुण्ड पर अहोई अष्टमी के कलेण्डर के साथ बिधि विधान से पूजा अर्चना करती है। बही गौडीय सम्प्रदाय के बिख्यात संत भक्ति दास ने बताया कि श्री राधारानी जन्म अष्टमी तथा अहोई अष्टमी का बिशेष महत्व बताया। भाद्रमास की अष्टमी तथा कार्तिक मास की अष्टमी का अलग अलग महत्व है। योगीराज भगवान कृष्ण की जन्माष्टमी बर्ष में केवल एक वार मनाई जाती हैं। जवकि श्री राधारानी की जन्माष्टमी बर्ष में दो बार मनाई जाती हैं। राधारानी का पहला जन्म भदों मास की अष्टमी के दिन राधाष्टमी के नाम से मनाई जाती हैं और दूसरा जन्म कार्तिक मास की अष्टमी के रूप में मनाई जाती हैं। क्योंकि अहोई अष्टमी की अर्द्ध रात्रि को श्री राधारानी ने अपने कंगन से राधरानी कुण्ड को प्राकट्य किया था। जिसमें श्री राधारानी ने अहोई माता को बरदान दिया की आज के दिन तेरी पूजा होगी। और जो निसंतान दम्पत्ति कार्तिक माह अष्टमी की अर्द्ध रात्रि को राधारानी कुण्ड में स्नान करेगा उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी। अहोई अष्टमी साही स्नान के दौरान कस्वा में स्नान करने के लिये सुवह से ही कुण्ड के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड का जमाबडा लग गया। राधारानी कुण्ड के घाटों पर इतनी भीड हो गई की कुण्ड की ओर आने वाले श्रद्धालुओं को पैर रखने तक को स्थान नही मिल पाया।













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