BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

अवैध लाइसेंस की खरीद-फरोख्त मामले में एटीएस का बड़ा खुलासा...

अवैध लाइसेंस की खरीद-फरोख्त मामले में एटीएस का बड़ा खुलासा...जयपुर । राजस्थान में एटीएस ने भले ही अजमेर से देश भर में हथियारों के अवैध लाइसेंस बनाने और बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दिया हो लेकिन कई राज्यों में बदमाशों को हथियार पहुंच गए। गन हाउस के जरिए हथियारों की खरीद फरोख्त में स्थानीय पुलिस और प्रशासन की बड़ी चूक सामने आई है। लाइसेंस निलंबित होने के बाद भी अजमेर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने कभी गन हाउस का निरीक्षण करने की जहमत तक नहीं उठाई। अपराधियों और रसूखदारों ने इसका फायदा उठाकर ना केवल लाइसेंस बनाए बल्कि अवैध रूप से हथियार भी खरीदते रहे। एटीएस की पड़ताल में सामने आया कि नसीराबाद के एचएस ने भी अजमेर के गन हाउस से ही हथियार खरीदा था। एटीएस की टीम ने अजमेर के जुबेर के साथ ही पंजाब से विशाल और जम्मू कश्मीर से राहुल को गिरफ्तार किया है। ऐसे में चौंकाने वाली बात ये है की एटीएस इन आरोपियों से क़रीब 700 से ज़्यादा अवेध लाइसेंस जब्त किए हैं, जिसमें से 20 ज़्यादा लाइसेंस राजस्थान में जारी हुए हैं। इनकी जांच के दौरान राजस्थान के उन व्यक्तियों की पड़ताल की जाएगी जिन्होंने इनसे अवैध हथियार खरीदे हैं। अभी तक की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सैनिक अधिकारियों के नाम से भी लाइसेंस जारी किए हैं। आरोपियों के पास से जम्मू-कश्मीर के कूपवाड़ा और कठूवा जिले के कलेक्टर और गृह विभाग की मोहर मिली हैं। राजस्थान ही नहीं मध्यप्रदेश, पंजाब में भी हथियार सप्लाई किए गए हैं। पंजाब और जम्मू-कश्मीर के गन हाउस से हथियार लाकर अजमेर के वलीगन हाउस से बेचे जाते थे। अजमेर के वलीगन हाउस का लाइसेंस निलंबित चल रहा था, इसके बावजूद यहां पर हथियारों की खरीद फरोख्त चल रही थी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कभी इसकी पड़ताल नहीं की जबकि आरोपी जुबेर के दादा वली मोहम्मद को पुलिस पहले भी गिरफ्तार कर चुकी थी। पुलिस अधिकारियों की माने तो कलेक्टर को गन हाउस का नियमित निरीक्षण करना होता है। अगर स्थानीय प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता तो इनका नेटवर्क इतने बड़े स्तर पर नहीं फैल पाता। आरोपी 2007-2008 से पहले बैकडेट में लाइसेंस जारी करते थे जबकि नियमानुसार 2008 के बाद कोई भी राज्य हथियारों का नेशनल लाइसेंस नहीं बना सकता है। अवैध हथियारों की रोकथाम के लिए नियमों में परिवर्तन किया गया, जिसकी जानकारी आमजन को भी नहीं है। इसी का फायदा उठाते हुए पुराने लाइसेंस जारी किए जाते थे। आरोपी जुबेर ही नहीं उसके दादा वली मोहम्मद भी अवैध हथियारों के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस पड़ताल में सामने आया कि यह परिवार और जुबेर के रिश्तेदार पूरी तरह से अवैध हथियारों के कारोबार में लिप्त रहे हैं।

साभार-khaskhabar.com 

 

 

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More