देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। डाल से फूल समर्पित करना आसान होता है, लेकिन जवानी का पुष्प अर्पित करना आसान नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर खुशी जताते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा आज उन लोगों का तप और बलिदान शाश्वत हुआ, जिन्होंने अपनी भरी जवानी में अपने जीवन को रामलला के काम के लिए समर्पित किया। आज जो परिणाम हमारे सामने है वह एक दिन में नहीं आया है। इसके लिए लम्बा संघर्ष हुआ है। कई लोगों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया तो कई युवाओं की जवानी इस आंदोलन के लिए समर्पित हो गई।
वात्सल्य ग्राम में रविवार को मीडिया से वार्ता करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि रामजन्मभूमि के लिए पांच सौ साल लगातार संघर्ष चला। ये संघर्ष केवल भगवान के जन्मस्थान का नहीं, बल्कि सारा विश्व जो भौतिकवाद, आतंकवाद की मार को झेल रहा है, उसका मार्ग प्रशस्त करने का था। ये जिम्मेदारी भारत की इसलिए थी कि भारत के पास ज्ञान का अमृत है। इस अमृत को सुरक्षित रखना और बांटना भारत की जिम्मेदारी है। हम राजनैतिक रूप से आजाद तो हुए, लेकिन बहुत भारी मानसिक गुलामी के शिकार रहे। श्रीरामजन्म भूमि के आंदोलन ने हमें चेतना दी। मंदिर का ताला भी खुला और हिंदू समाज के बुद्धि के ताले भी खुले। राममंदिर की लड़ाई सिर्फ मंदिर निर्माण की लड़ाई नहीं थी। उसके पीछे दृष्टि थी कि हमारी संस्कृति, सभ्यता की ऐसी वृहद भूमि है, जो हमारी जड़ों का पोषण करती है। किसी दूसरे वृक्ष की अमरबेल बनना उन्हें शोभा नहीं देता, जिसके पास खुद का अमर वट वृक्ष हो। न्यायालय के फैसले ने बहुत बड़ा इतिहास रचा और सत्य की पुनरू स्थापना हुई।













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