देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreशिशु गृहः दो बच्चों की मौत के बाद, चार और बच्चे अस्पताल में भर्ती
मथुरा। राजकीय बाल गृह मेें उल्टी और दस्त से पीडित चार और बच्चे शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए। आगरा के एसएन अस्पताल में भर्ती दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। इसी बीच, शासन ने लापरवाही बरतने पर बाल गृह के प्रभारी को निलंबित कर दिया। राजकीय बाल गृह शिशु में मंगलवार से बच्चे उल्टी दस्त से बीमार हो रहे हैं। गुरुवार तक 12 बच्चों की तबीयत खराब हो चुकी थी। इनमें आगरा के एसएन अस्पताल में भर्ती दो बच्चों गोपाल और वंशिका ने गुरुवार को दम तोड़ दिया था। जबकि चार अन्य में दो की हालत शुक्रवार को भी नाजुक बनी हुई थी।
राजकीय बाल शिशु ग्रह में दो बच्चों की मौत और एक दर्जन से अधिक बच्चों के बीमार होने के मामले में बाल शिशु गृह के प्रभारी कनिष्ठ लिपिक भुवनेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। वहीं बाल शिशु गृह से खाद्य विभाग, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने खाद्य सामग्रियों के सैंपल लिए।
दो दिनों से राजकीय बाल शिशुगृह में मासूम बच्चों के बीमार होने का सिलसिला चल रहा है। जिसमें आगरा इलाज के दौरान 6 माह और डेढ़ साल के दो मासूम की कल मौत हो गई थी। एक दर्जन बच्चों का मथुरा जिला अस्पताल में और चार बच्चों का आगरा हायर सेंटर में इलाज चल रहा है, जिनमें से 2 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
पूरे घटनाक्रम के पीछे डायरिया की बीमारी फैलने की बात सामने आ रही है, जो दूध की बोतलों से एक दूसरे बच्चे को बिना धोए हुए दूध पिलाने के चलते इंफेक्शन फैलने के कारण हुई है। पूरे मामले पर शासन की तरफ से बाल शिशु ग्रह के प्रभारी को कार्य में लापरवाही बरतने के चलते निलंबित कर दिया है।
पूरे घटनाक्रम में देखने के बाद जिलाधिकारी सर्वज्ञ मिश्र की भी लापरवाही देखने को मिली है, पिछले 5 माह से जिलाधिकारी शिशु गृह के निरीक्षण के लिए ही नहीं गए। जबकि मीडिया को जानकारी देते हुए उन्होंने दो से तीन दिन पहले ही निरीक्षण की बात कही है, जिलाधिकारी पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी बात कि मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ आलाधिकारी लापरवाही क्यों बरती रहे हैं, और दो बच्चों की मौत और 12 बच्चों के बीमार होने का जिम्मेदार आखिर कौन है। यह एक बड़ा सवाल है।
शिशु गृह के निरीक्षण का खुलासा तब हुआ, जब हमने शिशु गृह की नर्स एवं सहायक प्रभरी बीना से पूरे मामले की जानकारी की। बीना ने बताया कि पिछले 5 माह से बाल शिशु गृह का निरीक्षण नहीं हुआ है और न ही जिलाधिकारी वाल शिशु गृह आए हैं, फिर आखिर जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम मिश्र दो से तीन दिन पहले निरीक्षण की बात क्यों कह रहे हैं। एक जिम्मेदार अधिकारी इस तरह के बयान देकर पूरे मामले को दबाने के प्रयास में लगे हैं, जहां इतनी बड़ी लापरवाही हो गई। जहां मासूम बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। वहां डीएम साहब झूठ बोल कर पूरे मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।













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