देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreसौंख। हाथ में पूजा की थाल, उसमें बेलपत्र, पुष्प, दीप और बम-बम की उच्चारण। गुरूवार को महाशिवरात्रि पर्व पर हर शिवालय में यही दृश्य देखने को मिला। कही फूल बंगला सजाए गए तो कही भोले भंडारी का भस्म से श्रंृगार किया गया। भोर होते ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ लग गई। कोई सिर पर कलश तो कंधे पर कांवड़ लिए भोले के द्वार पहुंचा। कुछ भक्तों की टोली ढोल-नगाड़ों की धुनों पर झूमती नजर आई। जेहर प्रथा भी धूमधाम से निभाई गई। मंदिरों की सुरक्षा को लेकर चैकी प्रभारी राधवेंद्र सिंह मयफोर्स के तैनात रहे। भक्ति का आलम ऐ रहा कि प्रत्येक मंदिर हर-हर महादेव से गुंजायमान हो गया। शिवलिंग पर दूध तो कोई गंगाजल चढ़ाकर भोले बाबा की आराधना की । देर शाम मंदिरों में महाआरती हुई। भक्तोें ने जगह-जगह भंडारे का आयोजन कर प्रसाद भी बांटा। इस दौरान द्वारिकाधीश मंदिर, दाउजी मंदिर, चामुंडा देवी मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, भोले बाबा मंदिर आदि मंदिर परिसर में पूजन हुआ। देहात के मंदिर में शिव भक्ति गीत और भजनों की गूंज सुनाई देने लगी। भक्तों ने दुग्ध मिश्रित जल और गंगाजल से भगवान शिव परिवार की प्रतिमाओं का अभिषेक किया। बेलपत्र, फल, फूल, भांग व मिष्ठान, रोली-चावल आदि सामग्री से उनका पूजन किया। और सामूहिक रूप से भोलेनाथ की आरती उतारी। दोपहर तक मंदिरों में तांता लगा रहा। चेयरमैन भरत सिंह कंुंतल ने बताया कि महाशिवरात्रि को लेकर मंदिर मार्गो पर विशेष सफाई कराई गई।













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