देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreनई दिल्ली। अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। प्रियंका आए दिन ट्वीट कर सरकार को घेर रही हैं। अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है।
मनमोहन ने गुरुवार को बिजनेसलाइन को दिए इंटरव्यू में कहा कि हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते हैं कि देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पहले ही बहुत समय निकल चुका है। हर क्षेत्र को राहत देने के लिए अलग-अलग उपाय करने के नजरिये में राजनीतिक ताकत का फालतू इस्तेमाल करने या नोटबंदी जैसी ऐतिहासिक गलती करने के बजाय सरकार के लिए अगली पीढ़ी का स्ट्रक्चरल रिफॉर्म करने का सही वक्त आ गया है।
यह याद रखना जरूरी है कि यह एक ऐसी सरकार है, जिसे भारी जनादेश मिला है वह भी एक बार नहीं, बल्कि लगातार दो-दो बार। जब मैं वित्त मंत्री या फिर प्रधानमंत्री बना था, तब हमें इतना बड़ा जनादेश नहीं मिला था। इसके बावजूद हमने काफी उपलब्धियां हासिल कीं और देश को वर्ष 1991 के संकट और वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से सफलतापूर्वक बाहर निकाला।
मुझे लगता है कि अब हम एक दूसरे तरह के संकट में घिर रहे हैं। एक लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक सुस्ती जो स्ट्रक्चरल और साइक्लिकल दोनों है। सबसे पहले सरकार को यह स्वीकाराना होगा कि हम संकट में घिर गए हैं। मुद्दे को पारदर्शी तरीके से निपटाने, विशेषज्ञों तथा तमाम हितधारकों की बातों को खुले दिमाग से सुनने और संकट से निपटने के लिए ठोस इरादा जताने की जरूरत है।
सबसे पहले जीएसटी व्यवस्था का सरलीकरण करना चाहिए, भले ही अल्पकाल में इससे राजस्व का नुकसान हो। इसके बाद सरकार को ग्रामीण खपत को बढ़ाने और कृषि क्षेत्र का कायापलट करने के अनोखे तरीके ढूंढने होंगे। भारत बेहद चिंता में डालने वाली आर्थिक सुस्ती के भंवर में फंसा है। पिछली तिमाही की जीडीपी विकास दर महज 5 फीसदी रही, जो छह साल का निचला स्तर है। अगर इस परिस्थिति से नहीं निकला गया तो रोजगार के क्षेत्र में सबसे बुरी स्थिति पैदा होगी।
साभार-khaskhabar.com













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