देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकिसी ने बिलकुल ठीक कहा है कि “यह देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का, इस देश का यारों क्या कहना”।
भारत पराक्रमियों का देश हैं, यह वीरों की जन्मभूमि है। यहां जन्मा हर एक व्यक्ति राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव लेकर जन्म लेता है। देशवासियों का यह प्यार उनका त्याग और इस देश के प्रति समर्पण ही इस देश की महानता को दर्शाता है। राष्ट्र के प्रति अपनी प्राणों की आहुति देने का भाव यह दर्शाता है कि हमें इस माटी से बढ़कर कुछ नहीं। इसी प्रकार के भारतीय वीरों के प्रसंग इस बात का वर्णन करते हैं कि अंतिम सांस तक, अपने शरीर में मौजूद रक्त की आखिरी बूंद तक उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा की और हंसते-हंसते अपने प्राण इस देश के लिए न्यौछावर कर दिए।
आज भारत की फर्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस यानि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) अपना 18वां अलंकरण समारोह मना रहा है। बीएसएफ भारतीय सीमाओं की सुरक्षा करने वाली प्राइमरी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स है। देश की सीमाओं की 24 घंटे निगहबानी करने वाले बीएसएफ जवान सिर्फ आतंकियों की घुसपैठ को ही नहीं बल्कि किसी भी तरह की तस्करी और सीमा पार से हो रहे अपराधों को रोकने का काम करती है।
बीएसएफ के अलंकरण दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि गृहमंत्री अमित शाह ने बल के अधिकारियों व कार्मिकों को पदकों से अलंकृत किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों को सलाम करता हूं जिन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया है क्योंकि पूरा देश जानता है कि आप सजग बनकर देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं, इसी कारण आज देश लोकतंत्र के अपनाए हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, उन बलिदानियों को कभी भुलाया नहीं जा सकता।’
आइए जानते हैं देश की सेवा में अपनी जान की बाजी लगाने वाले जवानों के शौर्य और साहस की वो गाथा, जिसे जानकर हर भारतीय फक्र करेगा…
दीपक मंडल, द्वितीय कमान अधिकारी, 145 बटालियन
दीपक कुमार मंडल त्रिपुरा में तैनात सीमा सुरक्षा बल की 145 बटालियन के कार्यकारी कमांडेंट के पद पर तैनात थे। 16 अक्टूबर 2017 को लगभग 1:40 बजे सोनामूरा के नजदीक बीएसएफ की गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली, जिस पर त्वरित निर्णय लेते हुए दीपक कुमार अपने साथ आरक्षक बी. चंद्रकांत व प्रेम सिंह को साथ लेकर तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हुए। इस दौरान दीपक कुमार मंडल की नजर सीमा चैकी ‘बेलारीदप्पा’ के नजदीक गो-तस्करी करते लगभग 25-30 संदिग्ध तस्करों पर पड़ी।
तस्करों से पूछताछ के दौरान ही उन पर तस्करों द्वारा पत्थरों व तेजधार वाले हथियारों से हमला कर दिया गया। इस दौरान कुछ तस्करों ने स्वयं के घेरे जाने के भय से अचानक दीपक कुमार मंडल को गाड़ी से कुचलने के उद्देश्य टक्कर मार दी। इस टक्कर में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 20 अक्टूबर 2017 को उन्होंने अंतिम सांस लेते हुए सर्वोच्च शहादत दी। दीपक के अदम्य शौर्य, साहस व राष्ट्र के लिए समर्पित कार्रवाई के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020 के गणतंत्र दिवस के मौके पर उन्हें बलिदानोपरांत ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
आरक्षक सीता राम उपाध्याय, 192 बटालियन
जम्मू के सीमावर्ती इलाके की चौकी जबोवाल के 192 बटालियन में सीता राम उपाध्याय बतौर आरक्षक तैनात थे। आतंकी गतिविधियों की दृष्टि से यह इलाका अति संवेदनशील क्षेत्रों में से एक था। 18 मई 2018 की मध्यरात्रि में पाकिस्तान द्वारा अचानक ही इस चौकी के नाका प्वाइंट पर एकाएक ही गोलीबारी शुरू कर दी गई। ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल सीता राम उपाध्याय ने पूरी हिम्मत एवं साहस के साथ दुश्मन की गोलीबारी का मुंहतोड़ जबाव दिया।
पाक रेंजरों के साथ घंटों तक चली इस गोलीबारी में एक गोली आरक्षक सीता राम उपाध्याय को लग गई। घायल होने के बावजूद भी सीता राम डटे रहे और जवाबी कार्रवाई करते हुए दुश्मन पर गोलीबारी जारी रखी। तुरंत ही उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां पर अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मां भारती के इस लाल ने मातृभूमि की रक्षा में अंतिम सांस ली। आरक्षक सीता राम उपाध्याय को उनकी अतुलनीय वीरता, अदम्य साहस एवं राष्ट्र-रक्षा के प्रति इनके समर्पण भाव के लिए वीरता के लिए पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है।
आरक्षक तपन मंडल, 173 बटालियन
आरक्षक तपन मंडल जम्मू और कश्मीर की भारत-पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बटालियन 173 के अंतर्गत सीमा चौकी ‘मंगूचक’ पर तैनात थे। 2 नवम्बर 2017 के दिन सुबह करीब 8 बजे सीमा चौकी एक पेट्रोलिंग पार्टी अंतर्राष्ट्रीय सीमा के नजदीक क्षेत्रीय प्रभुत्व व रखरखाव के उद्देश्य से जीरो लाइन पेट्रोलिंग के लिए निकली थी। आरक्षक तपन मंडल को पेट्रोलिंग पार्टी की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। लगभग 9:30 बजे जब पार्टी भारत-सीमा के रखरखाव के काम जुटी में हुई थी, तभी अचानक पाक पोस्ट से पेट्रोलिंग पार्टी को निशाना बनाते हुए, ऑटोमेटिक हथियारों से फायरिंग शुरू हुई। जवाबी कार्रवाई में आरक्षक तपन ने मोर्चा संभाला। इस दौरान एक गोली आरक्षक तपन मंडल के कंधे पर लग गई। फायरिंग के बीच मंडल अपनी जान की परवाह किए बगैर, पेट्रोलिंग पार्टी को तारबंदी की दूसरी तरफ (भारतीय क्षेत्र की ओर) सुरक्षित पहुंचाने के उद्देश्य से तत्परता से जुट गए और पूरी पार्टी को संकटग्रस्त इलाके से बाहर निकाला।
गंभीर अवस्था में घायल हुए आरक्षक तपन मंडल को आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा के पश्चात नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां मातृभूमि की रक्षा में इन्होंने शहादत प्राप्त की। आरक्षक तपन मंडल ने जिस शौर्य और सामरिक कौशल का प्रदर्शन किया, वह सीमा प्रहरियों के लिए प्रेरणादायी है। सीमा प्रहरी के पराक्रम व कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए भारत सरकार द्वारा इन्हें वर्ष 2020 के गणतंत्र दिवस पर ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया।
आरक्षक, देवेंद्र सिंह, 173 बटालियन
मई 2018 में आरक्षक देवेंद्र की तैनाती जम्मू-कश्मीर से लगती भारत-पाक सीमा पर तैनात 173 बटालियन की सीमा चौकी ‘मंगूचक’ पर थी। 14 मई 2018 को रात्रि करीब 11:30 बजे सीमा पोस्ट में नाका ड्यूटी पर तैनात आरक्षक देवेंद्र सिंह की नजर ड्यूटी पर स्थापित एचएचटीआई (रात में देखने वाला यंत्र) में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हो रही संदिग्ध हरकत पर पड़ी। आरक्षक देवेंद्र ने तुरंत साथी जवानों को इसकी सूचना देते हुए सावधान किया।
मध्यरात्रि में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के नजदीक देवेंद्र को अचानक दोबारा संदिग्ध गतिविधियां एचएचटीआई पर दिखाई दीं, जिसके बाद आरक्षक देवेंद्र ने तुरंत अपनी एलएमजी बंदूक से फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान पाक पोस्ट ने भी भारतीय मोर्चे को लक्ष्य कर भीषण फायरिंग शुरू कर दी। इसी बीच सीमा पोस्ट को लक्ष्य करके की जा रही भीषण फायरिंग के बीच कुछ गोलियां आरक्षक देवेंदर को लग गई। अत्यधिक रक्त प्रवाह के बीच आरक्षक देवेंदर को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां भारत मां के इस लाल ने अंतिम सांस लेते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
आरक्षक देवेंद्र सिंह के इस उच्च कोटि के शौर्य के मान्यता स्वरूप भारत सरकार ने वर्ष 2020 के गणतंत्र दिवस पर इस जांबाज सीमा प्रहरी को बलिदानोपरांत ‘वीरता के लिए पुलिस पदक‘ से अलंकृत किया।
मुख्य आरक्षक ब्रिजेंद्र बहादुर सिंह, 192 बटालियन
14-15 सितंबर 2017 के दिन मुख्य आरक्षक ब्रिजेंद्र बहादुर सिंह जम्मू-कश्मीर में तैनात 192 बटालियन की सीमा चौकी ‘चिनाज’ में तैनात थे। रात्रि लगभग 02:45 बजे सीमा पोस्ट के ठीक सामने स्थित पाक पोस्ट ‘खानूर’ से पाक रेंजर्स द्वारा अचानक भारतीय पोस्ट को निशाना बनाते हुए भीषण फायरिंग शुरू कर दी गई। इस दौरान चौकी पर तैनात ब्रिजेंद्र बहादुर सिंह ने भी तुरंत अपने साथी जवानों को सावधान कर LMG संभाली और दुश्मन पर जवाबी हमला शुरू कर दिया। पाक पोस्ट द्वारा अत्याधुनिक हथियारों से की जा रही भीषण फायरिंग के बीच ये जवाबी हमला करते हुए दुश्मनों पर टूट पड़े।
सीमा पोस्ट को लक्ष्य कर की जा रही फायरिंग के बीच एक गोली अचानक मुख्य आरक्षक ब्रिजेंद्र सिंह के पेट में लग गई। गंभीर रूप से घायल हो चुके ब्रिजेंद्र सिंह को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया जहां मां भारती के इस लाल ने अंतिम सांस लेते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। मुख्य आरक्षक ब्रिजेंद्र बहादुर ने अपनी जान की परवाह किए बगैर जिस पराक्रम व कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया वह अनुकरणीय है। सीमा प्रहरी की इस जांबाजी को भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर इन्हे बलिदानोपरांत ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया।
सहायक उप-निरीक्षक, सत नारायण यादव, 92 बटालियन
03 जून 2018 के दिन सहायक उप-निरीक्षक सत नारायण यादव जम्मू और कश्मीर में तैनात 33 बटालियन की सीमा चौकी ‘चक फगवारी’ पर तैनात थे। मध्यरात्रि के लगभग 01:15 बजे पाक पोस्ट ने अचानक सीमा पोस्ट को लक्ष्य कर फायरिंग शुरू कर दी। जिस पर नाका कमांडर सहायक उप-निरीक्षक सत नारायण यादव व जवानों ने मोर्चा संभालते हुए संबंधित पाक पोस्ट पर जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलियां बरसानी शुरू कर दी। पाक पोस्ट द्वारा स्वचालित हथियारों से लगातार की जा रही फायरिंग के बीच कुछ गोलियां सहायक उप-निरीक्षक सत नारायण यादव को लग गईं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई जारी रखी और दुश्मन को अत्यधिक क्षति पहुंचाई। गंभीर रूप से घायल सहायक उप-निरीक्षक सत नारायण यादव को नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां देश के इस सुपुत्र ने शहादत प्राप्त की।
भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर सहायक उप-निरीक्षक सत्य नारायण यादव (बलिदानोपरांत) को ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
आरक्षक विजय कुमार पांडेय, 33 बटालियन
3 जून 2018 के दिन आरक्षक विजय कुमार पांडेय जम्मू और कश्मीर की अंतर्राष्ट्रीय भारत-पाक सीमा पर तैनात 33 बटालियन की सीमा चौकी ‘चक फगवारी’ पर तैनात थे। रात के समय लगभग 1:15 बजे पाक पोस्ट द्वारा अचानक सीमा पोस्ट को लक्ष्य कर फायरिंग शुरू कर दी गई। इस पर आरक्षक विजय कुमार पांडेय ने मोर्चा संभाला और पाक पोस्ट पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। लगातार फायरिंग के बीच कुछ गोलियां आरक्षक विजय कुमार पांडेय को लग गई। गंभीर रूप से घायल हो चुके आरक्षक विजय कुमार पांडेय को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां मां भारती के इस लाल ने शहादत प्राप्त की। इस पूरी कार्रवाई के दौरान आरक्षक विजय कुमार पांडेय ने जिस शौर्य व साहस का प्रदर्शन किया उसके मान्यतास्वरूप भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर आरक्षक विजय कुमार पांडेय (बलिदानोपरांत), को ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
संदीप कुमार गुप्ता, सहायक कमांडेंट, 8 बटालियन
दिसंबर 2017 में संदीप कुमार गुप्ता सहायक कमांडेंट की तैनाती नक्सल प्रभावित इलाके मलकानगिरी, उड़ीसा में 8 बटालियन में थी। 14-15 दिसंबर की मध्यरात्रि इलाके में नक्सलियों के हरकत की गुप्त सूचना मिली। इस पर संदीप कुमार गुप्ता ने विशेष रणनीति तैयार करते हुए नक्सलियों के विरूद्ध ऑपरेशन लॉन्च किया। इस दौरान अचानक इनकी मुठभेड़ नक्सलियों से हो गई। संख्या में अधिक नक्सलियों ने इन्हे तीनों ओर से घेरते हुए भीषण गोलीबारी शुरू कर दी। इस पर संदीप कुमार गुप्ता ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अलग-अलग दिशाओं में गोलीबारी शुरू कर दी। इनके कुशल मार्गदर्शन में की गई फायरिंग से एक नक्सली वहीं ढेर हो गया और बाकी नक्सली स्वयं के घिरने के आभास स्वरूप, वहां से भाग खड़े हुए। इनके पराक्रम और शौर्य के मान्यतास्वरूप भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर संदीप कुमार गुप्ता को ‘वीरता के लिये पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
मुख्य आरक्षक, विजय करन सिंह, 33 बटालियन
3 जून 2018 के दिन मुख्य आरक्षक विजय करन सिंह 33 बटालियन की सीमा चौकी ‘चक फगवारी’ पर तैनात थे। रात के समय लगभग 1:15 बजे पाक पोस्ट द्वारा अचानक सीमा पोस्ट को लक्ष्य कर फायरिंग शुरू कर दी गई। नाका कमांडर के आदेशानुसार मुख्य आरक्षक विजय करन सिंह ने मोर्चा संभालते हुए संबंधित पाक पोस्ट पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इस बीच कुछ गोलियां मुख्य आरक्षक विजय करन सिंह को लग गई। फिर भी वे मोर्चा संभालते हुए दुश्मन को लगातार क्षति पहुंचाते रहे।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान मुख्य आरक्षक विजय करन सिंह ने जिस अदम्य साहस व शौर्य का प्रदर्शन किया वह सभी सीमा प्रहरियों के लिए प्रेरणादायी है। इनके पराक्रम और शौर्य के मान्यतास्वरूप भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य आरक्षक विजय करन सिंह को ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया।
आरक्षक, चंद्रप्पा लमानी, 163 बटालियन
आरक्षक चंद्रप्पा लमानी, फरवरी 2017 में सीमा सुरक्षा बल की 163 बटालियन जम्मू-कश्मीर में भारत-पाक लाइन ऑफ कंट्रोल ड्यूटी पर तैनात थे। 20-21 फरवरी की मध्यरात्रि में आरक्षक चंद्रप्पा लमानी संतरी ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान इनकी नजर एक संदिग्ध व्यक्ति पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इन्होने मोर्चा संभालते हुए आतंकियों को ललकारा, जिस पर आतंकियों ने तुरंत पोजीशन लेते हुए मोर्चे को निशाना बनाकर भीषण फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के बीच अपनी साहसिक व सटीक कार्रवाई के जरिए उन्होंने एक आतंकी को वहीं ढेर कर दिया। तलाशी अभियान के दौरान घटनास्थल से मारे गए 1 आतंकी सहित 01 AK – 47 राइफल, 01 IED व भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद हुए। आरक्षक चंद्रप्पा लमानी के अदम्य शौर्य व अनुपम साहस को मान्यता प्रदान करते हुए भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर इन्हें ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया है।
सुशील सिंह, सहायक कमांडेंट, 8 बटालियन
दिसंबर 2017 में सुशील सिंह सहायक कमांडेंट की तैनाती नक्सल प्रभावित इलाके मलकानगिरी, उड़ीसा में तैनात 8 बटालियन में थी। 14-15 दिसंबर की मध्यरात्रि सुशील सिंह को इलाके में नक्सली हरकत की गुप्त सूचना मिली। ऑपरेशन के दौरान अचानक ही इनकी मुठभेड़ नक्सलियों से हो गई। इस पर नक्सलियों ने स्वयं को घिरता देख तीन ओर से इनके दल पर भीषण फायरिंग शुरू कर दी। इस पर सुशील सिंह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए मोर्चा संभाला और अपनी टुकड़ी से नक्सलियों पर अलग-अलग दिशाओं में गोलीबारी शुरू कर दी।
इनके कुशल मार्गदर्शन में की गई फायरिंग से एक नक्सली वहीं ढेर हो गया और अन्य नक्सली इलाके से भाग खड़े हुए। तत्पश्चात इलाके में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान 01 नक्सली का शव सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान सुशील सिंह ने अपने जिस अदम्य शौर्य, रणकौशल व साहस का प्रदर्शन किया, भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर सुशील सिंह को ‘वीरता के लिये पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
मुख्य आरक्षक, विनय कृषाली, 8 बटालियन
दिसंबर 2017 में मुख्य आरक्षक विनय कृषाली की तैनाती नक्सल प्रभावित इलाके मलकानगिरी, उड़ीसा में तैनात 8 बटालियन में थी। 14-15 दिसंबर की मध्यरात्रि इनके सीओबी कमांडर को इलाके में नक्सलियों के हरकत की गुप्त सूचना मिली। जिस पर सीओबी कमांडर ने रणनीति तैयार कर पूरे दलबल के साथ एक विशेष ऑपरेशन लॉन्च किया। मुख्य आरक्षक विनय कृषाली भी इस ऑपरेशन का हिस्सा थे। मूवमेंट के दौरान ही अचानक इनके दल की नक्सलियों से मुठभेंड़ हो गई। इस पर मुख्य आरक्षक कृषाली ने भीषण फायरिंग के बीच अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए एक नक्सली को वहीं ढेर कर दिया। यह देख अन्य नक्सलियों के हौंसले पस्त हो गए और वे इलाके से भाग खड़े हुए।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान मुख्य आरक्षक विनय कृषाली ने अपने जिस शौर्य व साहस का प्रदर्शन किया, वह सभी सीमा प्रहरियों के लिए अनुकरणीय है। इनके पराक्रम और शौर्य के मान्यतास्वरूप ही भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य आरक्षक विनय कृषाली को ‘वीरता के लिये पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
आरक्षक संजोय पाल, 8 बटालियन
दिसंबर 2017 में आरक्षक संजोय पाल की तैनाती नक्सल प्रभावित इलाके मलकानगिरी, उड़ीसा में तैनात 8 बटालियन में थी। 14-15 दिसंबर की मध्यरात्रि इनके सीओबी कमांडर को इलाके में नक्सलियों के हरकत की गुप्त सूचना मिली। जिस पर कमांडर ने रणनीति तैयार कर पूरे दलबल के साथ एक विशेष ऑपरेशन लॉन्च किया। आरक्षक संजोय पाल भी ऑपरेशन का हिस्सा थे। मूवमेंट के दौरान ही अचानक इनके दल की नक्सलियों से मुठभेंड़ हो गई। इस पर आरक्षक संयोज पाल ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए, नक्सलियों के ऊपर निशाना लगाकर भीषण फायरिंग शुरू कर दी जिसके परिणामस्वरूप एक नक्सली वहीं ढेर हो गया व अन्य नक्सलियों को अत्यधिक क्षति पहुंची। जिस पर अन्य नक्सलियों के हौंसले भी पस्त हो गए और वे इलाके से भाग खड़े हुए।
इस पूरी कार्रवाई के दौरान आरक्षक संजोय पाल ने अपने जिस शौर्य व साहस का प्रदर्शन किया वह सभी सीमा प्रहरियों के लिए अनुकरणीय है। इनके पराक्रम और शौर्य के मान्यतास्वरूप ही भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर आरक्षक संजोय पाल को ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया गया है।
मुख्य आरक्षक, संतोष कुमार, 163 बटालियन
संतोष कुमार, फरवरी 2017 में सीमा सुरक्षा बल की 163 बटालियन जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल ड्यूटी पर तैनात थे। आरक्षक (अब मुख्य आरक्षक) संतोष कुमार भी इस बटालियन का हिस्सा थे। 20-21 फरवरी की मध्यरात्रि में लगभग 12:12 बजे अचानक आरक्षक संतोष की निगाहें एक संदिग्ध व्यक्ति पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक संतोष ने तुरंत इसकी सूचना साथी जवान व कमांडर को दी। तत्पश्चात जवाबी कार्रवाई करते हुए आतंकियों को ललकारा।
इस पर आतंकियों ने तुरंत पोजीशन लेते हुए मोर्चे को निशाना बनाकर भीषण फायरिंग शुरू कर दी। आरक्षक संतोष सहित नजदीकी मोर्चे पर तैनात अन्य सीमा प्रहरियों ने भी तुरंत मोर्चा संभालते हुए प्रभावी फायरिंग कर आतंकियों को पीछे हटने पर मजबूर करते हुए एक आतंकी को वहीं ढेर कर दिया। तलाशी अभियान के दौरान घटनास्थल से मारे गए 01 आतंकी सहित 01 AK- 47 राइफल, 01 IED व भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद हुए।
इनके इस अदम्य शौर्य व अनुकरणीय साहस को विधिवत मान्यता प्रदान करते हुए भारत सरकार द्वारा 71वें गणतंत्र दिवस पर आरक्षक संतोष को ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’ से सम्मानित किया है।
बता दें कि आज के समारोह में गृह मंत्री ने बीएसएफ के 23 सदस्यों को पदकों से अलंकृत किया, जिसमें 12 सदस्यों को वीरता के लिए पुलिस पदक (पीएमजी) और 11 सदस्यों को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक (पीएमएमएस) से सम्मानित किया गया, जबकि 4 कार्मिक कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके।













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