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डाकिया का बेसब्री से इंतजार, डाक मिली नाले में...!

मथुरा। डाकिया डाक लाया, मोबाइल के जमाने में यह पुरानी सी बात लगती है, इस लिए अब डाक विभाग को कम से कम चिट्ठी पत्री के लिए तो याद नहीं किया जाता है। इस लिए डाकिया और उसके काम को भी ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। बावजूद इसके अभी भी कई महत्वपूर्ण कार्य ऐसे हैं जो डाक विभाग और डाकिया के ही भरोसे हैं।

यहां तक कि कोरियर सेवाएं भी इन कामों के लिए अनुउपयोगी है। आज अगर कोई डाकिया का बेसब्री से इंतजार करता है तो वह युवा हैं। युवाओं की भर्ती के काॅल लेटर और दूसरे तमाम दस्तावेज और सूचनाएं आज भी सरकारी विभाग और प्राइवेट सेक्टर सरकरी डाक सेवा के जरिये ही कर रहे हैं।


शनिवार को जो वाकया सामने आया उससे करीब आधा दर्जन गांवों के युवाओं के पैरों तले की जमीन खिसक गई। वह शिकायत लेकर डीएम तक जा पहुंचे। थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है।  


शनिवार को धनगांव और उसके आसपास के करीब अधा दर्जन गांवों की डाक नाले में पडी मिली। जब कुछ युवकों की इस पर नजर गई तो उन्होंने बोरे को खोला, इसके बाद जो हुआ वह बेदह व्यथित करने वाला था।

ग्रामीणों ने डाकिया पर डाक को नाले में फैंकने का आरोप लगाया है। इस संबंध में एक शिकायतपत्र जिलाधिकारी को सौंपा और कार्रवाही की मांग की है। ज्ञापन सौंपने आये मकेश भाटी ने बताया कि सीआरपीएफ में फिजिकल के लिए एक एडमिट कार्ड आया था जोकि डाकिया द्वारा भेजा नहीं गया। गांव की पूरी डाक नाले में पडी मिली है। एक ही डाकिया चार पांच गांव की डाक बांटता है। उन्होंने कहाकि मेरे फिजिकल की तारीख निकल चुकी है।

अब इसका मैं क्या करूंगा। रोजागर के लिए मारामारी है, काॅल लेटर ही नहीं आ रहे हैं, जब काॅल लेटर आया तो उसे डाकिया ने नाले में फैंक दिया। सुबह जब डाकिया से इस बारे में युवकों ने पूछताछ की तो बताया कि यह गलती से हो गया है। करीब 20  युवकों के फिजिकल के एडमिट कार्ड थे।

इसके अलावा दूसरे कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी इसमें शामिल हैं। अभी कुछ की तारीख बची है वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहाकि हम चाहते हैं कि इसके लिए दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाही की जाये जिससे दूसरे लोगों को ऐसा करने में डर लगे, हमारे गांव का डाकिया बदल दिया जाये।

नारद संवाद

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