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विश्व हिन्दू परिषद ने 56 वां स्थापना दिवस मनाया

मथुरा। चेतन्य कुटी पानी घाट पर विश्व हिन्दू परिषद् बृज प्रांत ने 56वां स्थापना दिवस गायत्री यज्ञ में आहुति देकर मनया। यज्ञ में गायत्री मंत्र  हनुमान चालीसा तथा विजय मत्र की आहुतियां दी गयी ।


पुर्ण आहुति के बाद उपस्थित सन्तों एवं राम भक्तों ने विहिप के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेवां नन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि संन 1964 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मुंबई में विश्व हिन्दू परिषद् की स्थापना सन्तो व संघ के सर संघचालक पूज्य गुरु गोलवर द्वारा की गई थी। 

स्वामी महा मनडलेश्वर चित्त प्रकाशन्ंद ने कहा कि ब्रज ब्र्न्दावन के महांन राष्ट्र सन्त  श्री प्रभूदत्त ब्रहमचारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही थीं। महामन्द्लेश्वर राम सरुप दास ने कहा कि ब्रह्मचारी जी महाराज की प्रेरणा से ही जनसंघ की स्थापना 21 अक्तूबर 1951 को  ब्रहमचारी जी के संकीर्तन भवन झूसी प्रयाग
मे हूई थी बाद में वही 1979 मे भा.ज.पा. के नाम से जानी जाती है। श्री महन्त रघुनाथ नाथ दास ने कहा कि पहला हिन्दू स्म्म्मेलन कुम्भ मेला प्रयाग में 1979 में ब्रहमचारी जी ने विश्व हिन्दू परिषद् के द्वारा कराया गया। जिसमें ब्रहमचारीजी पूज्य देवरहा बाबा को भी स्म्म्मेलन मे ले गये थे।

इसी सम्मेलन में वि.हि.प. ने राम जन्म भूमि मन्दिर निर्माण आन्दोलन को सन्तांे को सौंप दिया गया था। पूज्य स्वामी पूर्ण नेनदुजी ने कहा कि  1986 विश्व हिन्दू स्म्म्मेलन उडुपी करनाटक में  हजारों सन्तो ने राम जन्म भूमि का ताला खोलने की ह्कार भरी बृहमचारीजी के द्वारा ताला न खोलने पर आत्मदाह करने की घोषणा की गई । सन्तो के उडुपी लौटने से पहले ही तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अयोध्या पहुंचकर राम जन्म भूमि मन्दिर का ताला खोल दिया गया था।


 वि.हि.प. के प्रानतीय धर्मा चार्य समपर्क प्रमुख कैप्ट्ंन हरिहर शर्मा ने कहा कि श्री राम जन्म भूमि मन्दिर को 1528में ध्वस्त करते समय से हिन्दू लगातार संघर्ष करते चले आ रहे थे । 1992 ढांचा टूटने तक लगातार युद्ध हुए यह 76वा सनघर्ष था।

विश्व हिन्दू परिषद् ने आन्दोलन को सन्तांे को सांैपा यह जनजन का  आन्दोलन बना 9 नवम्बर 2019 के दिन सर्वोच्च न्यायालय ने मंदिर निर्माण के लिये निर्णय सुनाया। कैपटन शर्मा ने कहाकि निर्णय के बाद भी यह कार्य इतना सरल नहीं था हिंदू विरोधी ताकतें तांडव करती रही भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए क्या क्या नहीं कहा परन्तु मोदी है तो मुंमकिन है। प्रधानमंत्री मोदी बनारस से सांसद हैं फिर भी अयोध्या नहीं आये।

पांच वर्षांे तक सत्तात्मक संघर्ष और छटवें वर्ष में कश्मीर  से धारा 370 हटी,  श्रीराम जन्म भूमि पर निर्णय समान नागरिक संहिता की बात विश्व मंच पर भारत को पहूंचाया चीन की हेकड़ी युद्ध की आहट कोरोना महांमारी तेजी से बदला इतिहास  भूगोल और मनुष्यता की छटपटाहट केवल 5 अगस्त 2019 से 5 अगस्त 2020 को ही भूमि पूजन, श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से 3 व 5 अगस्त की तारीख  भेजी थी परन्तु 5 अगस्त को ही चुना खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने हाथ से भूमि पूजन किया।

इस संघर्ष की गाथा अब एक ऐसा इतिहास है जिसे पढकर नयी पीढ़ी बहुत कुछ सीखेगी। हमारे लिये भी गर्व की बात है और हम सब का सौभाग्य है कि हंम  गौरवशाली 5 अगस्त के दिन साक्षी बने और परिषद् के सदस्य के रूप में सेवा का अवसर मिला।


   विश्व हिन्दू परिषद् के केंद्रीय मार्ग दर्शक मण्डल व उच्चाधिकार समिति के सदस्य मह्न्त फूलडोल बिहारी दास ने  कहा कि  श्रीराम जन्म भूमि पर  भव्य दिव्य मन्दिर निर्माण की मंगल वेला एक नये युग का सूत्रपात है। यह  आस्थावान आत्मस्वाभिमान से परिपूर्ण आत्मनिर्भर भा रत के नव निर्माण की आधारशिला भी हैं सैकडांे वर्ष की पराधीनता से मुक्त अयोध्या को देखना स्वयं में अति सुखद है।

महामंडलेश्वर आदित्या नन्द गिरी सहित बडी संख्या में सन्त महंत, विश्व हिन्दू परिषद् के ब्रजेंद्र नागर ओम प्रकाश चैधरी, हरि सिंह आर्य, पंडित तरुण शर्मा, राजेश शर्मा एडवोकेट,  राजू भैया आदि प्रमुख रूप से उपस्थि रहे। बाद में आर्ति तथा प्रसाद वितरण किया गया।

 

नारद संवाद

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