देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मथुरा के पं.दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा संस्थान एवं गो अनुसंधान केन्द्र (वेटरनेरी) मथुरा से 11 सितम्बर 2019 मंे देशभर के लिए पशु टीकाकरण योजना का ऐलान किया था। योजना का प्रचार भी बडे पैमाने पर किया गया।
योजना जब धरातल पर आई तो जहां से ऐलान हुआ उसी जनपद में दुर्गति का शिकार हो गई। जिम्मेदार अब इसके लिए संसाधन और किसानों की जागरूकता का बहना बना रहे हैं। साल में टीकाकरण के दो चरण होने थे, अभी तक पहला चरण भी पूरा नहीं हुआ।
मथुरा जनपद में सितम्बर माह में यह योजना पूरी होनी थी, सितम्बर महीने के अंत तक जनपद में 7 लाख 90 हजार पशुओं का खुरपका और मुहंपका की बीमारी के विरूद्ध टीकाकरण होना था। पहली बार इस योजना में टीकाकरण के साथ साथ टैगिंग को भी जोडा गया है। यानी जिस पशु को टीका लगाया जाएगा उस के कान में टैग भी लगाया जाएगा। अभी तक 7 लाख 90 हजार पशुओं के सापेक्ष 4 लाख 64 हजार पशुओं का टीकाकरण हुआ है।
जबकि टैगिंग मात्र 2 लाख 65 हजार पशुओं की हो सकी है। जिम्मेदार अधिकारी अब अक्टूबर माह के अंत तक लक्ष्य को हासिल करने की बात कर रहे हैं। जो आंकडे प्रस्तुत किये जा रहे हैं उनकी सत्यता साबित होना बाकी है।
जटिलता को देखते हुए विभाग ने यह काम ग्राम प्रधानों के मत्थे मढ दिया गया है, जो इस समय पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। खुद अधिकारियों के अनुशार जिन वैक्सीनेटरों का चयन ग्राम पंचायत स्तर पर किया गया था वह भी इस काम में रूचि नहीं दिखा रहे हैं।
तमाम वैक्सीनेटर काम छोड कर जा चुके हैं। इसके लिए वह मेहनाते के भुगतान की पेचीदगियों को बता रहे हैं। वैक्सीनेशन के बाद टैगिंग और फिर पोर्टल पर अपलोड होगा रिकार्ड, इसके बाद एप्रूवल होगा और तब कहीं जाकर प्रति वैक्सीन मेहनता मिलेगा। ऐसे में बचे हुए करीब 15 दिन में लक्ष्य हासिल करना असंभव नहीं तो बेहद कठिन है।
टैगिंग का विरोध कर रहे हैं किसान
मुख्य पशु चिकित्साधिकरी योगेन्द्र सिंह के मुताबिक टीकाकरण में देरी की वजह टैगिंग भी है। पशु पालक टैगिंग का विरोध कर रहे है। इसके लिए कुछ भ्रांतियां जिम्मेदार है। पशुपालकों को लगता है कि टैगिंग के बाद लोग समझेंगे कि उन्होंने पशु पर लोन ले लिया है, अथवा कोई भी उनके पशु पर लोन ले सकता है। पशु सरकारी हो जाएगा। बरसात के समय में एक दो प्रतिशत पशुओं के काम पक भी जाते हैं।
े300 ग्राम पंचायतों में प्रधानों को दी जिम्मेदारी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी योगेन्द्र सिंह ने बताया कि संसाधनों की कमी को देते हुए उपर से निर्देश मिले थे कि ग्राम प्रधानों के माध्यम से लक्ष्य को पूरा किया जाए। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर वैक्सीनेटर का चयन किया गया था। ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी थी कि वह वैक्सीनेशन और टैगिंग के बाद पोर्टल पर रिकार्ड को अपलोड करेंगे।
2.5 रूपये प्रति पशु मेहनताना मिलना है वैक्सीनेटर को
वैक्सीन लगाने के लिए जिस वैक्सीनेटर का चयन किया उसको प्रति पशु 2.5 रूपये का मेहनताना मिलना है। लेकिन इस का भुगतान तब होगा जब वैक्सीनेशन, टैगिंग और पोर्टल पर अपलोड होने की प्रक्रिया के बाद इसको एप्रूवल मिल जाएगा। इसमें भी किसी तरह की कोई शिकायत नहीं होगी। पशुपालकों से पैसे लेने जैसे मालले सामने नहीं आएंगे।
बीच में ही काम छोड गये वैक्सीनेटर
जिन वैक्सीनेटर का चयन किया गया था वह बीच में ही काम छोड गये। बीच में काम छोडने वाले ऐसे लोगों का कहना है कि इसकी वजह पहले काम और फिर भुगतान के लिए इंतजार है। इस बीच आने जाने सहित उनके खर्चे होंगे, वह इतना इंतजार करने की स्थिति में नहीं हैं।
टैगिंग की प्रक्रिया पशुपालकों के हित में है। यह पशु के आधार कार्ड की तरह है। इसमें 12 डिजिट का कोड नम्बर होता है। वैक्सीनेशन का काम पहले मार्च में होना था, कोविड के कारण विलम्ब हुआ। पशुपालक किसी भ्रांति में न आएं हमारे लोगों का सहयोग करें। योगेन्द्र सिंह, मुख्य पशु चिकत्साधिकारी













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