देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreजनजातीय समुदाय रामायण और महाभारत के दिनों से भारतीय समाज का अभिन्न अंग हैं। आदिवासी लोगों की अनूठी जीवन शैली और रीति-रिवाजों के साथ समृद्ध परंपराएं, संस्कृतियां और विरासत हैं। भारत कीआबादी में लगभग सौ मिलियन आदिवासी शामिल हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय की नोडल एजेंसी ट्राइफेड ने होली के लिए स्पेशल प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं। ये सभी प्रोडक्ट्स जनजातीय समुदायों द्वारा ही बनाये गए हैं। ट्राइफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीर कृष्णा ने प्रसार भारती को बताया कि ट्राइफेड इस वक्त 25 लाख लोगों का परिवार है और अगले 90 दिनों के भीतर पूरे देश को ट्राइबल उत्पादों से डिजिटली कनेक्ट करने की कोशिश की जाएगी।
आत्मनिर्भर भारत की पूरी आत्मा इस योजना में बसती है: प्रवीर कृष्णा
इसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए रंगीन कुर्ते, विभिन्न प्रकार की बुनाई और शैलियों में बंडी, साड़ी, विभिन्न परंपराओं जैसे महेश्वरी, चंदेरी, बाग, कांथा, भंडारा, टसर, संबलपुरी और इकत में परिधान और स्टॉल होली संग्रह का एक हिस्सा है। इसके साथ प्राकृतिक, हर्बल उत्पाद जैसे जैविक गुलाल, जैविक साबुन, शैंपू, हर्बल तेल और पैक शामिल हैं। एमडी प्रवीर कृष्णा कहते हैं कि कारीगर अक्सर बिचौलियों के चक्कर में फंस जाते हैं। उन्हें तोड़ने के लिए और आदिवासी जनजाति समुदायों को सीधे मार्किट तक एक्सेस करने के लिए ट्राइफेड उनकी मदद कर रहा है। वह कहते हैं, “पीएम मोदी के आत्मनिर्भर भारत आवाह्न ने ट्राइफेड को आत्मा देने का काम किया है। आत्मनिर्भर भारत की पूरी आत्मा हमारी इस योजना में बसती है।”
वन धन योजना से जुड़े हैं 20 लाख कारीगर
उन्होंने प्रसार भारती को बताया कि हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स के अलावा लगभग 100 प्रकार की जो जंगल में उत्पादित सामग्रियां होती हैं इन्हें भी वन धन योजना के तहत मार्केट में भेजा जाता है। इसमें करीब 20 लाख कारीगर जुड़े हुए हैं। इनमें प्राकृतिक और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले जनजातीय उत्पाद जैसे जैविक हल्दी, सूखा आंवला, जंगली शहद, काली मिर्च, रागी, त्रिफला, और मसूर की दाल, मूंग दाल, उड़द की दाल, सफेद बीन्स और वारली शैली या पत्ताचित्र की प्राचीन कलाकृति में डलिया शामिल हैं। वह आगे कहते हैं, “हम 300-300 लोगों की उत्पादन फैक्ट्री सेटअप कर रहे हैं, जहां पर ये लोग जंगल के उत्पादों को वैल्यू ऐड और ब्रांड करके बाजार में भेज रहे हैं। देश के 25 लाख जनजाति एनत्रोप्रेन्योर ट्राइफेड से जुड़े हुए हैं।
बी वोकल फॉर वोकल बाई ट्राइबल
भविष्य को लेकर एमडी प्रवीर कहते हैं, “ट्राइफेड इस वक्त 25 लाख लोगों का परिवार है, हम उनके उत्पादों को देश के हर घर में पहुंचाना चाहते हैं। हमने उनके लिए कहा है, बी वोकल फॉर वोकल बाई ट्राइबल। ई-कॉमर्स की ओर हम लोग जाएंगे। जिस तरह से अमेजॉन ग्लोबल व अन्य हैं वैसे ही इन प्रोडक्ट्स को हम ग्लोबल लेवल पर पहुंचाना चाहते हैं। 25 लाख के इस परिवार को 50 लाख तक पहुंचाएंगे।” वह आगे कहते हैं कि हमारी कोशिश रहेगी कि अगले 90 दिनों में हम पूरे देश को ट्राइबल उत्पादों से डिजिटली कनेक्ट कर दें और हम हर घर तक दस्तक देंगे। 100 दूतावास बाहर हैं उनसे चर्चा हुई है, देश के विदेश सचिव से हमारी चर्चा हुई है उनके माध्यम से हम विदेश के 100 देशों में भी भारत के ट्राइबल प्रोडक्ट्स पहुंचाएंगे, इन्हें एक्सपोर्ट करेंगे।
रंग और खुशी के इस त्योहार में ट्राइब्स इंडिया के 130 आउटलेट्स या tribesindia.com वेबसाइट से इन्हें खरीदा जा सकता है। ये प्रयास जनजातीय उपज और उत्पादों के विपणन और विकास के माध्यम से आजीविका को बढ़ावा देने और आदिवासियों को सशक्त बनाने के लिए किया जा रहा है।













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