देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreकोविड-19 महामारी के दौर में, सरकार सिर्फ बीमारी से ही नहीं लड़ रही है बल्कि हर मोर्चे पर देश को संभालने की कोशिश कर रही है। इसी का नतीजा है कि इस वर्ष महामारी के बावजूद कृषि निर्यात में देश ने कमाल किया है। भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के सचिव डॉ. अनूप वधावन ने कहा कि 2020-21 के दौरान कृषि निर्यात ने शानदार प्रदर्शन किया है।
कृषि व्यापार संतुलन में आया सुधार
मीडिया के साथ बातचीत करते वाणिज्य सचिव ने जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों, 2017-18 में 38.43 बिलियन डॉलर, 2018-19 में 38.74 बिलियन डॉलर तथा 2019-20 में 35.16 बिलियन डॉलर तक स्थिर बने रहने के बाद 2020-21 के दौरान कृषि एवं संबद्ध उत्पादों (समुद्री तथा बागान उत्पादों सहित) का निर्यात तेजी से बढ़कर 41.25 बिलियन डॉलर तक पहुंचा है। यह पिछली बार के मुकाबले 17.34% अधिक है। रुपये के लिहाज से यह वृद्धि 22.62% है, जो 2019-20 के 2.49 लाख करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 2020-21 के दौरान 3.05 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंची। वर्ष 2019-20 के दौरान भारत का कृषि और संबद्ध आयात 20.64 बिलियन डॉलर था और 2020-21 के तदनुरुपी आंकड़ें 20.67 बिलियन डॉलर के हैं। कोविड-19 के बावजूद, कृषि के व्यापार संतुलन में 42.16 प्रतिशत का सुधार आया है, जो 14.51 बिलियन डॉलर से बढ़कर 20.58 बिलियन डॉलर हो गया।
कृषि उत्पादों (समुद्री तथा बागान उत्पादों को छोड़कर) के लिए वृद्धि 28.36 प्रतिशत रही है, जो 2019-20 के 23.23 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2020-21 के दौरान 29.81 प्रतिशत तक जा पहंची है। भारत कोविड-19 अवधि के दौरान स्टेपल के लिए बढ़ी हुई मांग का लाभ उठाने में आगे रहा है।
चावल और गेंहू के निर्यात में कई गुना इजाफा
अनाजों के निर्यात में भारी वृद्धि देखी गई है, जिसमें गैर-बासमती चावल का निर्यात 136.04% बढ़कर 4794.54 मिलियन डॉलर का रहा, गेहूं का निर्यात 774.17% बढ़कर 549.16 मिलियन डॉलर का रहा, तथा अन्य अनाजों (मिलेट, मक्का तथा अन्य मोटे अनाज) का निर्यात 238.28% बढ़कर 694.14 मिलियन डॉलर का रहा।
अन्य कृषि संबंधी उत्पादों, जिनके निर्यात में 2019-20 के दौरान उल्लेखनीय बढोतरी दर्ज की गई है, वो निम्नानुसार हैं, आयल मील 90.28 प्रतिशत की बढोतरी के साथ 1,575.34 मिलियन डॉलर, चीनी 41.88 प्रतिशत की बढोतरी के साथ 2789.97 मिलियन डॉलर, कच्चा कपास 79.43 प्रतिशत की बढोतरी के साथ 1,897.20 मिलियन डॉलर, ताजी सब्जियां 10.71 प्रतिशत की बढोतरी के साथ 721.47 मिलियन डॉलर और वेजीटेबल आयल 254.39 प्रतिशत की बढोतरी के साथ 602.77 मिलियन डॉलर रहा है।
इन देशों के साथ किया निर्यात
भारत के कृषि उत्पादों के सबसे बड़े बाजारों में अमेरिका, चीन, बांग्लादेश, यूएई, वियतनाम, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, नेपाल, ईरान और मलेशिया शामिल हैं। इनमें से अधिकांश गंतव्यों ने वृद्धि प्रदर्शित की है, जिसमें सर्वाधिक वृद्धि इंडोनेशिया (102.42 प्रतिशत), बांग्लादेश (95.93 प्रतिशत) और नेपाल (50.49 प्रतिशत) के साथ दर्ज की गई है।
मसालों का निर्यात भी बढ़ा
अदरक, काली मिर्च, दाल चीनी, इलायची, हल्दी, केसर आदि जैसे मसालों के निर्यात में भी भारी बढोतरी दर्ज की गई है। ये सभी मसाले उपचारात्मक गुणों के लिए जाने जाते हैं। 2020-21 के दौरान, काली मिर्च के निर्यात में 28.72 प्रतिशत की बढोतरी हुई, जो बढ़कर 1269.38 मिलियन तक जा पहुंची, दाल चीनी के निर्यात में 64.47 प्रतिशत की बढोतरी हुई, जो बढ़कर 11.25 मिलियन तक जा पहुंची, जायफल, जावित्री और इलायची के निर्यात में 132.03 प्रतिशत की बढोतरी हुई, जो 81.60 मिलियन डॉलर से बढ़कर 189.34 मिलियन तक जा पहुंची, अदरक, केसर, हल्दी, अजवायन, तेज पत्ता आदि के निर्यात में 35.44 प्रतिशत की बढोतरी हुई जो बढ़कर 570.63 मिलियन तक जा पहुंची। आपको बता दें, मसालों के निर्यात ने 2020-21 के दौरान लगभग 4 बिलियन डॉलर का अब तक का सर्वोच्च स्तर छू लिया। यह अपने आप में बहुत एतिहासिक है।
जैविक निर्यात में भी हुआ इजाफा
2020-21 के दौरान जैविक निर्यात 1040 मिलियन डॉलर का रहा। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 50.94% रहा। पिछले वर्ष 2019-20 में जैविक निर्यात 689 मिलियन डॉलर का था। जैविक निर्यातों में ऑयल केक/मील, तिलहन, अनाज एवं बाजरा, मसाले एवं कोंडीमंट (छौंक), चाय, औषधीय पादप उत्पाद, सूखे मेवे, चीनी, दलहन, काफी आदि शामिल हैं।
पहली बार क्लस्टरों से भी हुआ निर्यात
Prasar Bharati News Service - PBNS
इस वर्ष पहली बार कई क्लस्टरों से भी निर्यात हुआ है। उदाहरण के लिए, वाराणसी से ताजी सब्जियों तथा चंदौली से काले चावल का पहली बार निर्यात हुआ है, जिससे उस क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ हासिल हुआ है। अन्य क्लस्टरों में, नागपुर से संतरे, थेनी और अनंतपुर से केले, लखनऊ से आम आदि का भी निर्यात हुआ है। महामारी के बावजूद, मल्टी-मॉडल मोड द्वारा ताजी बागवानी ऊपज का निर्यात हुआ और खेपों को इनके उपज क्षेत्रों से हवाई जहाज और समुद्र के रास्ते से दुबई, लंदन तथा अन्य गंतव्यों पर भेजा गया। मार्केट लिंकेज के लिए विभाग, फसल उपरांत वैल्यू चेन विकास तथा एफपीओ जैसे संस्थागत संरचनाओं की आरंभिक सहायता से पूर्वोत्तर के किसान भारतीय सीमाओं से आगे भी अपने मूल्य वर्द्धित उत्पादों को भेज सकने में सक्षम हुए।
इन देशों को किया गया अनाजों का निर्यात
अनाज निर्यात का प्रदर्शन भी 2020-21 के दौरान बहुत अच्छा रहा है। हम पहली बार कई देशों को निर्यात करने में सक्षम रहे हैं। उदाहरण के लिए, चावल का तिमोर-लेस्टे, प्यूर्तो रिको, ब्राजील आदि जैसे देशों में निर्यात किया गया है। इसी प्रकार, गेहूं का निर्यात भी यमन, इंडोनेशिया, भूटान आदि देशों में किया गया है और अन्य अनाजों का निर्यात सूडान, पोलैंड बोलिविया आदि को किया गया है।
इन कदमों की वजह से बढ़ा निर्यात
पहली कृषि निर्यात नीति बनी
सरकार द्वारा अब तक की पहली कृषि निर्यात नीति (एईपी) दिसंबर 2018 में लागू की गई। एईपी के कार्यान्वयन की प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में, 18 राज्यों अर्थात महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल, नगालैंड, तमिलनाडु, असम, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, सिक्किम, मिजोरम एवं उत्तराखंड तथा दो केंद्र शासित प्रदेश, लद्दाख और अंडमान निकोबार द्वीप समूह ने राज्य विशिष्ट कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया है। 25 राज्यों एवं 4 केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य स्तरीय निगरानी समितियां गठित कर दी गई हैं। 28 राज्यों तथा 4 यूटी ने एईपी के कार्यान्वयन के लिए सबंधित नोडल एजेन्सियां भी नामांकित कर दी हैं।
क्लस्टर विकास
कृषि निर्यात नीति के एक हिस्से के रूप में, निर्यात संवर्धन के लिए 46 अनूठे उत्पाद-जिला क्लस्टरों की पहचान की गई है। 29 क्लस्टर स्तर समितियों का विभिन्न क्लस्टरों में गठन किया गया है। निर्यात के लिए क्लस्टर एक्टीवेशन बढ़ाया गया। वाणिज्य विभाग ने क्लस्टरों के एक्टीवेशन के लिए एफपीओ तथा निर्यातकों को लिंक करने के लिए अपीडा के जरिये कदम उठाया। कथित लिकिंग के बाद, ट्रांसपोर्टशन/लॉजिस्टिक मुद्दों का समाधान किया गया तथा लैंड लॉक्ड क्लस्टरों से निर्यात किया गया।
मिडल ईस्ट पर फोकस
मिडल ईस्ट के देशों में कृषि को बढ़ावा देने के लिए, इन देशों में भारतीय मिशनों के परामर्श से देश विशिष्ट कृषि निर्यात कार्यनीति तैयार की गई है। संभावित आयातक के साथ परस्पर संपर्क करने के लिए भारतीय निर्यातकों को एक मंच उपलब्ध कराने के लिए संबंधित देशों के सहयोग से वर्चुअल क्रेता विक्रेता बैठकों का आयोजन किया गया। इसने निर्यातकों एवं आयातकों को व्यवसाय करने के लिए भविष्य में और परस्पर संपर्क करने के लिए एक वर्चुअल मंच उपलब्ध कराया है।
बाजार पहुंच
कृषि मंत्रालय, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों के लिए बाजार पहुंच अर्जित करने के लिए लगातार प्रयास करता रहा है। भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में अनार के लिए, अर्जेंटीना में आम और बासमती चावल के लिए, ईरान में गाजर के बीज के लिए, उजबेकिस्तान में गेहूं के आटे, बासमती चावल, अनार एरिल, आम, केला तथा सोयाबीन आयल केक के लिए, भूटान में टमाटर, भिंडी और प्याज के लिए तथा सर्बिया में नारंगी के लिए बाजार पहुंच हासिल की है।













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