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ग्रामीणों का आरोप उनकी कहीं कोई सुंनवाई नहीं

मथुरा। नगर निगम का हिस्सा बन कर ग्रामीण गुस्सां है। शुरूआत में ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि नगर निगम में शामिल होने पर गांव की तकदीर बदल जाएगी लेकिन पहले कार्यकाल मंे ही ग्रामीण तकदीर को दोष देने लगे हैं। ग्रामीणांे की पीडा है कि नगर निगम मंे कहीं उनकी कोई सुनवाई नहीं है।

गर्मी बढने के साथ ही पानी की किल्लत भी बढने लगी है। नगर निगम विस्तार के बाद मथुरा के आसपास बसे गांवों को नगर निगम की सीमा मंे शामिल किया गया। सीमा विस्तार के दौरान ग्राम पंचायत से निकल कर नगर निगम में शामिल हुए अधिकांश गांवों के ग्रामीण इस अदला बदली से खुश नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब उनकी कोई सुनवाई नहीं होती है। जब वह ग्राम पंचायत का हिस्सा थे तब ग्राम प्रधान से वह अपना काम निकाल ही लेते थे। अब पार्षद और मेयर सुनने को तैयार नहीं है। नगर निगम के अधिकारियों से बात करने की उनकी हिम्मत ही नहीं होती है।


नगर निगम के वार्ड नम्बर 11 के गांव बाद के ग्रामीणों ने पानी नहीं मिलने की शिकायत करते हुए क्षेत्रीय पार्षद के खिलाफ प्रदर्शन किया। महिलाओं ने विरोध में मटके फोडे और पार्षद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों में गुस्सां इस कदर है कि क्षेत्रीय विधायक पर भी उन्होंने आरोप लगाये।

ग्रामीणों ने कहाकि वह राजनीतिक लोगों से हताश हो चले हैं। इस बार वह नोटा पर अपना वोट डालकर इस हताशा को जाहिर करेंगे। प्रदर्शन कर रही ग्रामीण महिला ओमवती का कहना था कि  गांव में पानी की किल्लत है। टैंकर से पानी की सप्लाई होती है। पिछले करीब पांच सप्ताह से गांव में पानी नहीं आया है।

उन्होंने कहाकि राजनीतिक पक्षपता भी हो रहा है। पार्षद प्रतिनिधि उन लोगों को कोई सुविधा मिलने का हिमायती नहीं है जिन्होंने उन्हें वोट नहीं दिये। ग्रामीणों का कहना था कि विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह भी उनकी सुध नहीं ले रहे हैं। शहर की बाहरी सीमा पर स्थित नगर निगम का हिस्सा बने दूसरे गांवों के ग्रामीणों की भी इसी तरह की शिकायतें हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम में उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार कहा जाता है कि रिफाइनरी की ओर से गांव की मदद हो रही है लेकिन यहां के हालात देख कर कोई भी समझ सकता है कि किसी स्तर पर कोई मदद नहीं मिल रही।  


वहीं ग्रामीणों का यह भी कहना है कि नगर निगम चुनाव के समय ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भाजपा के पक्ष में वोट के लिए कहा था कि अगर भाजपा का पार्षद जीतेगा तो पानी की लाइन में गंगाजल आएगा। गंगाजल की बात तो छोड़िए यहां तो लोग बूंद-बूंद के लिए मोहताज हैं और पेयजल आपूर्ति पूर्ण रूप से ठप्प है।

नारद संवाद

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