देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreचौमुहां। (गौरव सिसौदिया) कस्बे में स्थित ब्रह्माजी की झाड़ी में 14 सितंबर (आज) मेला व कुश्ती दंगल होगा। ब्रह्माजी के चार मुख के चलते कस्बे का नाम चौमुहां पड़ा था।शिव के श्राप से ब्रह्मा जी की पूजा नहीं होती है। ब्रह्मा जी का प्राचीन मंदिर चौमुहां व दूसरा मंदिर पुष्कर राजस्थान में है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार विष्णु और ब्रह्मा जी में कौन श्रेष्ठ है, को लेकर बहस हो गई। तभी शिव वहाँ आ गए। शिव ने अपना आकार बड़ा कर लिया और कहा जो इसकी थाह ले आएगा, वही बड़ा होगा। पाताल की ओर ब्रह्मा गए और आकाश की ओर विष्णु। थाह न मिलने पर विष्णु ने सच कह दिया जबकि ब्रह्मा जी ने आकर झूठ बोल दिया कि वे थाह ले आए हैं। इसी बात पर नाराज होकर शिव ने उन्हें श्राप दे दिया कि कलियुग में तुम्हारी पूजा नही होगी। एक अन्य कथा में ब्रह्मा जी ने श्रीकृष्ण की गायों व बछड़ों को चौमुहां की झाड़ियों में गुफा में छिपा दिया था। जब ब्रह्मा जी लौटकर आये तो देखा कि श्रीकृष्ण फिर से गाय चरा रहे हैं।
इस पर ब्रह्मा जी ने उनसे माफी मांगी। इसी झाड़ी में ब्रह्मा जी ने बहुत दिन तक तपस्या की। मन्दिर के पुजारी राजारामदास ने बताया कि ब्रह्माजी के दर्शन मात्र से लोगों के कष्ट दूर हो जाते हैं।













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