देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कांग्रेस के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष दीपक चैधरी के लिए जनपद में संगठन को खडा कना बडी चुनौती होगी। इसकी बडी वजह संगठन का देहात क्षेत्र में बेहद कमजोर होना है। सदर सीट से विधायक प्रदीप माथुर के जीतते रहने से शहर में सगंठन में भी जान रही और पार्टी मंे दम दिखता रहा लेकिन इस बीच देहात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। हालत यह है कि ब्लाक स्तरीय कमेटियों के गठन के लिए जिलाध्यक्ष को कार्यकर्ता तलाशने होंगे। देहात में जर्जर संगठन की हालत इतनी पतली है कि विधान सभा चुनावों में ढूंढे प्रत्याशी नहीं मिलते थे। विधान सभा चुनावों मंे प्रत्याशियों का कालम पूरा करने के लिए मशक्कत करनी पडती थी। दीपक चैधरी की पृष्ठभूमि ग्रामीण रही है। उनकी राजनीतिक पकड भी ग्रामीण क्षेत्रों में ही ज्यादा है। रालोद का जिलाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने इस काम को बखूबी अंजाम दिया था लेकिन रालोद देहात में हमेशां से मजबूत रहा है और शहर में कमजोर लेकिन कांग्रेस में यह एक दम उलट है। शहर में कांग्रेस हमेशां मजबूत दिखी है और देहात में कमजोर, नव नियुक्त जिलाध्यक्ष कि लिए संगठन को पूरे जिले में खडा करना किसी बडी चुनौती से कम नहीं है। यही वजह रही कि आलाकमान का भी ध्यान इस बात पर है कि संगठन पूरे जनपद में मजबूत रहे। विगत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को मिले महज 27 हजार वोट खुद पूरी कहानी कह देते हैं।













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