देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreअभी कुछ सालों में बहुत परिवर्तन हो रहे है आगे और ज्यादा होंगे...परिवर्तन ही इस कलयुग के भाग को आगे ले जाएगा...सालों बाद एक समय ऐसा आएगा....जब साइंस चरम पे होगी.....तब तक ये पुरानी पीढ़ियां इस धरा से जा चुकी होंगी...इसलिए सम्मान कीजिए उन पीढ़ियों का जो इस धरा पे आखिरी साबित होंगी....वर्तमान में चल रहा समय काल की गति से आगे बढ़ रहा है....इसलिए हरि नाम या जिस धर्म के आप है जिसको मानते है...उनकी आराधना कीजिए....खेर होना तो वो ही जो लिखा हुआ है...पर अपना कर्तव्य पूरा कीजिए धरा पे जीवों की सेवा भी ईश्वर की सेवा ही है....इसलिए एक बात.... राख तो होना था हमें मिट्टी में मिल जाना था, जीवन की यात्रा इतनी सरल नही थी जितना इस समझा था....अंधकार में रोशनी को तलाश रहे थे पर सामने उजाला था वो दिखा नही...माया का पर्दा ऐसा पड़ा की जो वादा किया था ईश्वर से उसे भूल गए जब आखिरी समय आया तब काल को देख कर डर गए.......आगे हरिहर की इच्छा













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