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इंसान के बारे जितना बोला जाए उतना कम है

ध्यान से पढ़े : इंसान के बारे जितना बोला जाए उतना कम है...१९९० के दशक में आसमान में तमाम गिद्ध दिखाई देते थे.एक बहुत प्यारी हमारी घर आंगन की चिड़िया गौरैया पता नहीं लगा ऐसे तमाम जीव गायब हो रहे है और बहुत हो चुके है पहले २जी दिया फिर ४जी दिया इन तमाम जी ने इतनी आसमान में उपकरणों की रेडिएशन फैला दी की इस मानव रूपी जीव ने इस धरा पे बहुत कुछ गायब कर दिया....अगर आप प्रकृति के साथ खिलवाड़ करेंगे तो बदले में वो आपको वो ही देगी जो आप उस के साथ करेंगे...खेर मुद्दा अब होने वाला है पानी का वायु तो अभी रहेगी इस धरा पे कलयुग के आखिरी पड़ाव के आस पास तक पर पानी कभी ४० फुट से ६० फुट मिल जाता था....पर अब १६० से २०० तक रेंज हो गई....आज तक इसका सही उपयोग कभी नहीं हुआ...खेर अगर देखना हो तो एक बार उन जगह जाओ जहां पानी की सबसे ज्यादा किल्लत है....उन से पूछो पानी की अहमियत....ऐसी तमाम बातें है जो एक पड़ाव के बाद पता लगती है अगर आज से आप और हम नई पीढ़ी को नई सीख देंगे तो कुछ जरूर बदलाव हो जाए शायद..... क्योंकि उम्मीद कम है में भी वो सारे उपकरण में शामिल हूं जिससे ये जीव हत्याएं हो रही है और हो चुकी है....इसलिए जीवन के इस दौर में कुछ तो अच्छा कर जाओ...आज तमाम बातें इधर उधर हम बोलते रहते है उदहारण मथुरा से गोवर्धन रोड पे ७० से ८० वर्ष पुराने वृक्ष काटे गए.....एक सड़क के लिए क्या आप ८० वर्ष पुराने पेड़ दे पाओगे नहीं खेर जीवन को इतना बुरा मत बनाओ......की आने वाले समय में मानव जाति के लोग आज के मानव से घृणा करने लगे की ये सब जब हो रहा था तो हमारे पूर्वज सुख सुविधा के लिए सब नष्ट करते जा रहे है।  हरिहर कृपा करें 

 

नारद संवाद

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