देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreहमायी बात --------> एक राजा ने दूसरे राजा को हारकर विजय हासिल की. उसने वहां की प्रजा से वादा किया की में इस राज्य में तालाब, बावड़ी, बच्चों को विद्या कुंवारी कन्याओं के लिए विवाह और लोगों को काम दूंगा आदि. कुछ समय बीता प्रजा ने स्थानीय मंत्रियों तक बात पहुंचना शुरू किया।
समय बीतते-बीतते एक वर्ष निकल गया. राजा घूमने फिरने और सत्ता के सुखों का आनंद लेने में व्यस्त था. समय निकलता गया उस राज्य के लोग दूसरे राज्यों में काम करने के लिए जाने लगे. धीरे-धीरे पड़ोसी राज्यों ने आक्रमण की तैयारी शुरू कर दी. पर राजा अपने सुखों को छोड़ने में असमर्थ था. कुछ वर्ष और निकलने के बाद राजा ने देखा प्रजा में विश्वास कम हो रहा है. राजा ने धीरे-धीरे अपने कुछ खास मंत्रियों के द्वारा प्रजा में अलख जलाना शुरू करवाया। प्रजा तो भोली होती है. राजा की बातों में फिर आगयी। राजा ने भरोसा दिया की हर के घर को महल बनाऊंगा, आपके घर से जो बहार गएँ है उन्हें यही काम दूंगा, और हर एक घर में बग्गी होगी। इसलिए प्रजा में ऐलान करा दिया की घरों को तोड़कर सामने जगह बनाओ। प्रजा को उम्मीद थी की राजा सही कह रहा है. इसलिए राजा की बात मानी। प्रजा में उत्साह आया और हर घर ने तोड़कर जगह बनायीं। पर राजा फिर अपने में खो गया. एक दिन बहुत तेज बारिश हुयी कई दिनों तक लोगों ने जो जगह बनायीं उसमे पानी भर गया. लोग बस उस पानी निकालने में लग गए राजा आया और बोला अरे में कैसे बग्गी दो यहाँ तो बहुत पानी भरा है इसे पहले निकालो फिर आगे सोचेंगे। राजा ने जब तक एक फौज बना चूका था, जिसका काम लोगों में विश्वास बना रहे..... यही काम था उस फ़ौज का। समय बीतता गया प्रजा में विद्रोह की स्थिति उत्पन्न होने लगी. राजा भाप गया की अब में इसे रोक नहीं सकता। शेष भाग आगे आएगा













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