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MATHURA : श्रद्धालु बीमार हुए लेकिन जिम्मेदार कोई नहीं

मथुरा। आचमन मुद्दे पर चैतरफा घिरे प्रशासन में बैठे जिम्मेदारों ने अपनी अपनी गर्दन बचाते हुए सच स्वीकार किया है। उपजिलाधिकारी गोवर्धन ने अपनी जांच आख्या जिलाधिकारी को सौंप दी है। जांच आख्या में राधाकुण्ड के श्यामकुण्ड और राधाकुण्ड के पानी को पीने और आचमन योग्य नहीं माना है। जांच रिपोर्ट में यह भी स्वीकारा है कि कार्तिकमास में यहां रह कर पूजा अर्चना करने वाले बाहरी लोग लगभग अनिवार्यरूप से आचमन करते हैं लेकिन वह आचनम के पानी से बीमार नहीं हुए हैं। रिपोर्ट में भंावित बीमार होने की वजह दूषित भोजन को माना गया है। जो जांच आख्या एसडीएम गोवर्धन राहुल यादव ने डीएम सर्वज्ञराम मिश्र को सौंपी है उसमें चिकित्साधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गोवर्धन की आख्या में यह स्पष्ट किया गया है कि तीर्थ यात्रियों विशेष कर बंगाली समुदाय द्वारा विभिन्न स्थानों और भण्डारों से भोजन एकत्रित कर बासी भोजन का सेवन करने से यह समस्या उत्पन्न हुई है। कोई भी मरीज गंभीर अवस्था में नहीं है। इस घटना के संबंध में श्री गिरिराज अस्पताल राधाकुण्ड से जो आख्या तीस अक्टूबर को प्राप्त की गई उसके मुताबिक 25 से 30 अक्टूबर तक कुल ग्यारह मरीज देखे गये। जिनमें से एक मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गोवर्धन भेजा गया। जिनको उल्टी दस्त की शिकायत थी। इन सभी का इलाज दैनिक ओपीडी में किया गया। ये सभी मरीज उपचार के बाद चले गये। इनमें से किसी की भी स्थिति गंभीर नहीं थी।

कुण्डों को साफ रखने के लिए तकनीक नहींः नगर पंचायत
नगर पंचायत राधाकुण्ड ने अपनी आख्या में कहाकि राधाकुण्ड के सीमा के अंतर्गत आने वाले पौराणिक  राधाकुण्ड एवं श्यामकुण्ड में अहोई अष्टमी पर करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। डुबकी लगाये जाने के कारण कुण्डों का पानी पीने योग्य नहीं रहा। 20 और 21 अक्टूबर के स्नान के लिए शासन के निर्देश पर अपने संसाधनों और क्षमता के अनुरूप कुण्डों की सफाई कराई गयी थी। फिटकरी डाल कर कुण्डों को शुद्ध करने का प्रयास किया गया था। गुरूग्राम संस्था द्वारा कुण्डों में जल को शुद्ध करने के लिए दवाई भी डाली गई थी। किन्तु नगर पंचायत राधाकुण्ड के पास तकनीकी संसाधन नहीं होने के कारण इन दोनों कुण्डों के पानी में सुधार नहीं हो पाया है।

ये हैं जांच आख्या के मुख्य बिंदु
-नगर पंचायत राधाकुण्ड में कार्तिक मास में हजारों बाहरी श्रद्धालु अस्थाई रूप से निवास करते हैं। ये श्रद्धालु दान में प्राप्त भोजन ही ग्रहण करते हैं।
-आश्रम में दान के रूप में वितरित होने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच नहीं की जाती है। श्रद्धालुओं द्वारा भोजन को असमय ग्रहण किया जाता है। बाहर से आये श्रद्धालुओं के बीमार होने का यह कारण भी हो सकता है।  
-नगर पंचायत राधाकुण्ड में कुण्ड को साफ करने के लिए तकनीकी संसाधनों का अभाव है। अतः कुण्ड की सफाई के लिए तकनीकी संसाधनों से सम्पन्न संस्था को नामित किया जाना उचित होगा।
-अधिशासी अधिकारी राधाकुण्ड ने अपनी अख्या में कह है कि कुण्ड की सफाई नियमित रूप से की जाती है। लेकिन कुण्ड में रासायनिक तत्वों और मिश्रित काई की सफाई के लिए तकनीकी संसाधनों का अभाव है। ऐसी स्थिति में कुण्ड का पानी दूषित ही बना रहता है।
-क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी एसडीएम को बताया कि पूर्व में आई जांच रिपोर्ट के आधार पर कुण्ड का पानी पीने और आचमन योग्य नहीं पाया गया है।
-बाहर से आने वाले श्रद्धालु आचमन के बिना अपनी यात्रा को पूर्ण नहीं समझते।

 

नारद संवाद

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