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डिजिटल होगा तर्पण, इस साल ऑनलाइन भी मोक्ष का द्वार खुलेगा

मथुरा। इस बार हमारे पितृ भी डिजिटल इंडिया का आभासा करेंगे। आनलाइन भी मोक्ष का द्वार खुलेगा।  पंडित जी आपके घर भोजन नहीं करेंगे और आॅनलाइन मंत्रों का जाप करेंगे जिससे आपके पितृ संतृप्त होंगे। आप बहुत ज्यादा दूरी पर हैं तो पंडित जी की दक्षिण उनके अकांउट में भेज सकते हैं। इसके लिए प्री बुकिंग भी करा सकते हैं जिससे एनवक्त पर किसी किसी दिक्कत का सामना न करना पडे।

आगर आपके पंडित जी आपसे ज्यादा दूरी पर नहीं है। फिर भी इस बार पंडित घर पर आकर भोजन नहीं करेंगे इसलिए पंडितों को दक्षिणा में फल,मेवा, वस्त्र, कच्चा राशन आदि उनके घर जाकर दिया जाएगा।कुछ लोग आश्रम आदि में भी दान करने की योजना बना रहे हैं। कोरोना काल में धर्मनगरी के कई पंडित और आचार्य व्हाट्सअप और फेसबुक के जरिये ऑनलाइन पिंडदान भी कराएंगे।


घर पर भी तर्पण किया जा सकता है। कोरोना काल में नदी किनारे इस बार पूजा आदि का विधान नहीं होगा। इसके लिए शहर के पंडितों और आचार्यों ने ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था की है।


कान्हा की नगरी मथुरा के विश्व प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर के ज्योतिषाचार्य अजय तैंलंग ने बताया कि सामान्यतयरू परिवार के किसी पूर्वज की मृत्यु के बाद जब उसका अंतिम संस्कार भलीभांति नही किया जाता है अथवा जीवित अवस्था में उसकी कोई इच्छा अधूरी रह जाती है तो उसकी आत्मा अपने घर और आगामी पीढ़ी के बीच भटकती रहती है तथा मृत पूर्वजों की अतृप्त आत्मा ही परिवार के लोगों को कष्ट देकर अपनी इच्छा पूरी करने के लिए दबाव डालती है।

पितृ दोष का कष्ट व्यक्ति की जन्म कुंडली में भी झलकता है। यह कष्ट शारीरिक से ज्यादा मानसिक होता है। इन मानसिक कष्टों में विवाह में अड़चन, वैवाहिक जीवन में कलह, परिश्रम के बावजूद परीक्षा में असफलता, नौकरी का लगना और छूट जाना, गर्भपात या गर्भधारण की समस्या, बच्चे की अकाल मौत,  मंद बुद्धि के बच्चे का जन्म होना, अत्याधिक क्रोध होना आदि प्रमुख हैं। इनमें से किसी के होने पर व्यक्ति के जीवन से आनन्द का लोप हो जाता है।

नारद संवाद

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