देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreजरूर पढ़े : बड़ी अजीब कहानियां है इस संसार की जिसको हम कभी जानते भी नहीं है वो इंसान हमारे एक समय गुजरने के बाद बहुत कुछ हो जाता है...आज की कहानी कुछ ऐसे ही है....एक प्रोफेसर थे में यहां पहचान और नाम नहीं खोल सकता क्योंकि कहानियां कुछ पर्दे में रहती है...पर वो सीख छोड़ जाती है....खेर ये कहानी छोटे से गांव से शुरू होते हुए राजधानी दिल्ली पहुंच जाती है...यहां से सफर शुरू होता है इस कहानी का.... एक छोटे से गांव का लड़का पढ़ लिख कर एक बड़े शहर में आता है...और एक अच्छा वैज्ञानिक बन जाता है....तभी उसे किसी रिसर्च के काम से भारत से बाहर जाना पड़ता है...जहां जिस देश में ये गए थे भारत से पांच लोग गए थे तभी उसकी मुलाकात एक अपने से वरिष्ठ वैज्ञानिक से हुई....वहां वो सालों तक रहे काफी घुल मिल गए दूसरी और नियति अपना चक्र घुमा रही थी...मुलाकात कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं लगा....तभी अचानक उन दिनों फोन के सेवा महंगी हुआ करती थी...एक संदेश आता है...यहां में दोनो लोगों को काल्पनिक नाम देता हु विजय के लिए आप की शादी तय कर दी गई है...आप लौटे के जब आयेंगे तो शादी होनी है हमें डेट बताई जाए...विजय तो अपना दिल दूसरी और मतलब काल्पनिक नाम श्रद्धा को दे बैठे थे....विजय ने श्रद्धा को बताया की ऐसे गांव में रिश्ता तय हो गया है...श्रद्धा यहां एक तमिल फैमिली और उच्च विचारों के घर परिवार से थी वहीं विजय जी एक गांव और वहां की परंपरा से जुड़े हुए विचार धारा से थे....विजय जी के अंदर थोड़ा भय था. पर वो उस मुकाम पे पहुंच गए थे इसलिए उन्हें ज्यादा चिंता नहीं हुई। दोनों भारत वापस आए विजय अपने गांव के लिए और श्रद्धा अपने घर के लिए रवाना हो जाती है। विजय उत्तर प्रदेश के गांव से आते थे वहां उन्होंने अपनी बात रखी तो परिवार वाले उखड़ गए और उन्होंने जो गांव की परंपराएं होती उसके अनुसार उन्होंने विजय को बहुत क्या बोलो शब्द नहीं है.... क्योंकि उनकी शादी वहां किन हालातों के दौरान हुई ये आज तक पता नहीं चल पाया....खेर महीनों बाद शादी के जब विजय दिल्ली लौटे तो श्रद्धा तो इंतजार कर ही रही थी.....तभी विजय ने बताया ये सब हो चुका है....श्रद्धा तो जैसे टूट के बिखर ही गई थी....इधर विजय भी अपना रिसर्च छोड़कर गांव वापस आ गए थे...और गांव के पास एक जनपद में वो बतौर डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर बन गए....आखिर इस कहानी में श्रद्धा सब हार के अपने शहर चली गई और आज एक कॉलेज में वो भी अपना समय गुजार रही है....कहानी यहां दिलचस्प हो जाती है कि श्रद्धा ने शादी ने की आज तक....खेर हमने देश के आने वाले दो होनहार वैज्ञानिक खो दिए जो अपने अपने जगह बेस्ट थे....कहानी जो भी हो कुछ न कुछ नया दे के जाती है...इस कहानी का एक ही अर्थ था....जीवन में कैसा भी पड़ाव आए उसका समाना करो.....खेर कुछ कहानियां अधूरी ही रह जाती है होके भी कभी पूरी नहीं हो पाती है ये बात भी पुराने समय की है.....गौतम













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