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शिशु सदनः दो बच्चें ने ली ’चिरनिंद्रा’, बाकी की नहीं टूटी ’तंद्रा’

मथुरा। दो बच्चों के चिरनिंद्रा में लीन होने के बाद भी जिम्मेदारों की तंद्रा नहीं टूटी है। प्रदेष बाल संरक्षण आयोग की चार सदस्यीय टीम ने रविवार को बाल षिषु गृहा का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण औचक नहीं था, पहले से तय था इस लिए निरीक्षण के दौरान बाल संरक्षण गृह में बरती जा रहीं अनियमितताओं को सामने आने से रोकने के लिए संरक्षण गृह में जो लेख खेला गया, वह दो बच्चों की मौत और दर्जन भर से अधिक बच्चों के बीमार होने की कहानी से किसी भी तरह से कम हैरान और हताष करने वाला नहीं था। आयोग की टीम में एक चिकित्सक भी सामिल थे। आयोग की टीम ने जब यह स्वीकारोक्ति की कि हमारे पहुंचने से पहले बच्चों को नषीला पदार्थ देकर गहरी नींद में सुला दिया गया है तो हर कोई भैचक्का रह गया। टीम के सदस्यों ने षिषु गृह में बच्चों को झकझोड कर बार बार जगाने का प्रयास किया लेकिन बच्चे इतनी गहरी नींद में थे कि जग नहीं रहे थे। बडी मुष्किल से एक बच्चा जगा लेकिन उसकी निंद्रा भी पूरी तरह से नहीं टूटी थी।
प्रदेष अध्यक्ष विशेष गुप्ता के नेतृत्व में पहुंची राजबाल संरक्षण आयोग की टीम ने गहनता से जांच की। टीम ने पाया कि दो बच्चों की मौत के बाद भी विभाग नहीं चेता है। टीम को कीडे युक्त खाद्य पदार्थ शिशु सदन में मिले। टीम के सदस्य बार बार बच्चों को जगा कर बात करना चाह रहे थे लेकिन बच्चे इस तरह से निढाल पडे थे कि आयोग की टीम को कहना पडा कि नषीला पदार्थ खिलाकर बच्चों को सुलाया गया है। टीम की सदस्य डॉक्टर सुचिता चतुर्वेदी, डॉक्टर नीता साहू और डॉक्टर जया सिंह को निरीक्षण के दौरान यह देखकर भारी विस्मय हुआ कि सारे के सारे बच्चे गहरी मदहोशी की नीद ने डूबे हुए थे जिन्हें झकझोरने पर भी वो जाग। नहीं पा रहे थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम की सूचना पाकर बच्चों को गहरी नींद में सुलाये रखने के लिये कुछ नशीली दवाई मिला कर दे दी गयी हो। इस पर डॉक्टर सुचिता चतुर्वेदी ने हैरानी जताते हुए बच्चों को दी जाने वाली खुराक का रजिस्टर चैक किया। रजिस्टर में की गईं प्रावविष्टियाँ देखकर उनका माथा ठनका 

सही जांच हो तो नप जाएंगे बच्चों की मौत के जिम्मेदार कई अधिकारी
निरीक्षण में कई चैंकाने वाली कमियों के साथ भारी लापरवाही और अनियमितता सामने आईं। निरीक्षण के दौरान बच्चों की दवाइयां, पाउडर, अंडर गारमेंट्स, जूते-कपड़े व अन्य उपयोगी वस्तुएं भारी मात्रा में स्टॉक में रखी होने के बावजूद राजकीय बाल शिशु सदन के कर्मचारियों ने आज तक बच्चों के लिए प्रयोग नहीं किया है। जब आयोग के अध्यक्ष और उनकी टीम ने शिशु सदन के खाने पीने के सामान के स्टोर का निरीक्षण किया तो वहां खाने पीने के सामान में चींटी-कीड़े पड़े पाए गए। इनमें अधिकतर सामान लंबे समय से रखे होने के कारण खराब स्थिति में पाया गया। । इसके अनुसार सभी बच्चों के लिए रोजाना 400 ग्राम देशी घी में खाना बनाया जाना दर्शाया गया था। जबकि कई बच्चे इतने छोटे हैं कि वो सिर्फ दूध और डबल रोटी पर निर्भर हैं। उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष विशेष गुप्ता ने बताया कि यहां काफी अनियमितताएं मिली हैं जिनकी जांच की जा रही है और पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री महोदय को प्रेषित कर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करवायी जाएगी।

हर बच्चे पर खर्च हो रहे 4 हजार रूपये महीने 
राजकीय बाल संरक्षण गृह को हर साल करीब 24 लाख रूपये की सरकार की ओर से आर्थिक मदद दी जा रही है। इस समय षिषु सदन में करीब 50 बच्चे हैं। प्रत्येक बच्चे हर महीने चार हजार रूपये सरकार की ओर से सदन को अनुदान दिया जा रहा है। इस हिसाब से करीब 24 लाख रूपये सालाना खर्च आ रहा है। 

6 महीने से नहीं किया डीएम ने निरीक्षण
जिलाधिकारी ने 6 महीने से सदन का निरीक्षण नहीं किया। टीम ने माना कि यहां बडे पैमाने पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। बच्चों के लिए मिलने वाले पैसे को बच्चों पर खर्च नहीं किया जा रहा है। अनियमितताओं को अधिकारियों ने परखा नहीं, उन पर पर्दा डाल दिया गया। 

 

नारद संवाद

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