देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कान्हा की नगरी श्री धाम वृन्दावन में हर उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इसी क्रम में शरद पूर्णिमा पर ठाकुर श्रीबांकेबिहारी लाल वर्ष में एक ही दिन बांसुरी, मोर मुकुट, कट काछनी पोशाक हार तथा लकुटी आदि धारण कर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। मन्दिर के सेवायत ज्ञानेंद्र आनन्द किशोर गोस्वामी ने बताया कि 9 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा वाले दिन ठाकुरजी का विशेष शृंगार होगा। सोने चांदी का श्रंगार कारीगरों ने तैयार किया है। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी लाल जी की सफेद पोशाक ब्रज के विशेष कारीगरों ने बनाई है। वही मन्दिर के सेवायत नितिन सावरिया बताते है कि श्रीमद्भागवत में वर्णन के अनुसार शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना किनारे गोपियों के साथ रात्रि वृंदावन में वंसीवट पर महारास किया था, इसलिए शरद पूर्णिमा वाले दिन ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी महाराज को शृंगार मोर मुकुट कट काछनी व बंसी धारण कराई जाती है। उस दिन ठाकुरजी को विशेष रूप से खीर एवं चंद्रकला का भोग चंद्रमा के दर्शन करने के पश्चात लगाया जाता है। इस दिन के बाद से ठाकुरजी की शीतकालीन भोगराग की सेवाएं प्रारंभ हो जाएंगी। प्रसाद में मेवा प्रयोग इत्र में हिना का प्रयोग एवं दूध भात में केसर का प्रयोग प्रारंभ हो जाएगा। शरद पूर्णिमा के दिन ठाकुरजी को बंसी चढ़ाने का बहुत विशेष महत्व है।













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