देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। कोरोना के असर किस तरह और कहां होंगे इसके संकेत मिलने लगे हैं। सरकार की तरफ से आवाजाही की छूट दिये जाने के बाद भी लोग यात्रा करने से परहेज कर रहे हैं। खास कर लोग सार्वजनिक परिवहन संसाधनों का उपयोग नहीं करना चाहते।
जिन्हें बाहर जाना पड रहा है वह निजी संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। यही वजह है कि बस स्टैण्डों पर जिनती बस खडी रहती हैं उतनी सवारी नहीं निकल रही हैं। प्रतिदिन रोडवेज को हर बस स्टैण्ड से लाखों रूपये का नुकसान हो रहा है। एक अनुमान के मुताबिक मंडल स्तर पर यूपी रोडवेज को करीब एक करोड रूपये का प्रतिदिन घाटा उठाना पड रहा है।
लाॅकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के पैदल अपने गंतव्य को जाने को लेकर बवाल मचा था। इसी बीच प्रदेश सरकार ने मजदूरों को उनके घरों तक पहुचाने के लिए रोडवेज की बसों का संचालन लाॅकडाउन में ही शुरू कर दिया था। इसी बीच अनलाॅक की घोषणा कर दी गई। रोडवेज की बसों का संचालन बदस्तूर जारी रहा। शुरूआत में तो प्रवासी मजदूरों को बसें ढोती रहीं। इसके बाद यात्रियों का टोटा पड गया।
अब नौबत यह आ गई है कि बसें खाली दौड रही हैं। इंजार्च पुराना बस स्टैंड मथुरा के इंजार्च प्रेम सिंह ने बताया कि हालत बहुत खराब है। बस यहां से भर कर चली जाती है तो दूसरी ओर से खाली आती है। टेªनों से आने वाले यात्री ही अपने घरों तक पहुंचने के लिए बस से यात्रा कर रहे हैं। लोकल सवारी बिल्कुल नहीं निकल रही है। एक बस को भरने के लिए कई घंटे इंतजार करना पडता है।
उन्होंने बताया कि मंडल स्तर पर लगभग एक करोड रूपये का नुकसान प्रतिदिन रोडवेज को हो रहा है। बस चालक ने बताया कि बस का डीजल निकालने लायक सवारियां भी नहीं मिल रही हैं। उंगलियांे पर गिनने लायक सवारियां निकल रही हैं। जबकि सेनेटाइजर और स्क्रीनिंग सहित दूरसे कई सुरक्षा इंतजाम भी करने पड रहे हैं। मास्क, ग्लब्स का भी उपयोग नियमितरूप से किया जा रहा है।













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