देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। रालोद ने 28 अगस्त को किसान क्रांति दिवस के तौर पर मनाया। इस दौरान रालोद कार्यकर्ताओं ने सभी तहसीलों पर प्रदर्शन करने के बाद ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रीय लोकदल ने महंगाई और बेरोजगारी को भी मुद्दा बनाते हुए प्रदर्शन किया। जनपद की सभी तहसील पर रालोद कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के बाद ज्ञापन दिया। शनिवार को राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में सभी तहसीलों पर धरना प्रदर्शन किया।
रालोद नेता डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा कि हम आपका ध्यान किसानों से सम्बंधित मांगांे की ओर दिलाना चाहते हैं किसानों की फसलों पर लागत बढ़ गई है और मण्डियों में लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। किसानों के पास न तो दवाई के पैसे हैं और न ही बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटा पा रहे हैं। नौ महीनों से देश के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं ओर अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार का रवैया आंदोलन को कुचलने का है। इस अहंकारी किसान विरोधी सरकार के व्यवहार से मजबूर होकर राष्ट्रीय लोकदल 28 को किसान क्रांति के दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। छाता शुगर मिल को चालू किया जाए।
छात्र रालोद ब्रज प्रांत अध्यक्ष विश्वेन्द्र चौधरी ने कहा कि किसानों के बिजली के बिल मांफ किये जाए। किसानों के लिए डीजल पर सब्सिडी दी जाए। प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था को सुधारा जाए। शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। महिलाओं की सुरक्षा सम्मान की रक्षा की जाए। नहर बम्बो में सिचाई हेतु पानी की व्यवस्था की जाए।
इस मौके पर रविंद्र नरवार, गौरव मलिक, तौफीक आढ़ती, छात्र रालोद बृज प्रांन्त अध्यक्ष बिश्बेन्द्र चौधरी,नवाव सिंह पौनिया, हरवीर, आकाश चौधरी, सुशील चौधरी, मनोज चौधरी, अमित पटेल, राकेश चौधरी, बने सिंह कुंतल, अनिल पचेहरा, हर्ष चौधरी, निशांत पचेहरा आदि मौजूद रहे। छाता तहसील पर आंदोलन का नेतृत्व राष्ट्रीय महासचिव अतुल सिसोदिया ने किया। छाता सुगर मिल को चालू कराने, बेरोजागरी, कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की गई। करीब दो बजे रालोद कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन सौंपा।
महावन तहसील पर रालोद के धरना प्रदर्शन का नेतृत्व मुकेश चौधरी ने किया। सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है जबकि किसानों की आमदनी इस सरकार के आने के बाद आधी रह गई है। हर ओर महंगाई की मार है जिससे किसान भी अछूता नहीं रहा है।













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