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श्रीकृष्ण जन्मभूमि, ईदगाह मामले में रिविजन याचिका मंजूर

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ईदगाह मामले में गुरुवार को मथुरा की जिला अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले में लोगों की दिलचस्पी थी। पांच मई को वादी की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन तथा अन्य द्वारा जिला जज की अदालत में बहस की गई।

दोनों तरफ की बहस सुनने के बाद जिला जज राजीव भारती ने निर्णय को रिजर्व करते हुए निर्णय के लिए 19 मई तय की थी। वादी पक्ष के वकील गोपाल खंडेलवाल के मुताबिक सितम्बर 2020 में सिविल कोर्ट ने इस केस को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि ये ’राइट इश्यू’ नहीं है। यानी इस मामले में किसी को वाद करने का अधिकार नहीं है, वाद की स्वीकारोक्ति के लिए पिछले करीब डेढ़ साल से जिला जज की अदालत में रिवीजन में सुनवाई चल रही थी।

 

इस मामले में डीजीसी शिवराम तरकर ने बताया कि याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। जिला जज अब किस कोर्ट को सुनवाई के लिए यह प्रकरण देंगे, अभी फैसला नहीं लिया गया है। याचिका में 2.37 एकड़ जमीन को मुक्त करने की मांग की गई है। कहा गया है कि श्रीकृष्ण विराजमान की कुल 13.37 एकड़ जमीन में से करीब 11 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थापित है। जबकि शाही ईदगाह मस्जिद 2.37 एकड़ जमीन पर बनी है। इस 2.37 एकड़ जमीन को मुक्त कराकर श्रीकृष्ण जन्मस्थान में शामिल करने की मांग याचिका में की गई है। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि अदालत में हमने अपना पक्ष रखा है। वादी पक्ष का कहना है कि इस मामले में संस्थान को समझौता करने का अधिकार नहीं है।

 

जमीन ठाकुर विराजमान केशव कटरा मंदिर के नाम से है। बता दें रंजना अग्निहोत्री ने राम जन्मभूमि अयोध्या प्रकरण में भी अदालत में वाद दायर किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.3 7 एकड़ जमीन पर दावा किया गया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि यह जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान की है और वहां पर शाही ईदगाह खड़ी है, वहां भगवान श्रीकृष्ण के जन्म स्थान और मंदिर का गर्भगृह है। वाद की पैरवी करने वाले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि न्यायालय ने बहस के बाद संबंधित निर्णय को रिजर्व कर लिया गया है।

 

बृहस्पतिवार को निर्णय दिया गया। अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा अदालत में पेश वाद में शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को श्री कृष्ण विराजमान की संपत्ति माना है और उन्होंने अदालत से कहा है कि यह संपत्ति श्रीकृष्ण विराजमान को सौंपी जानी चाहिए। वह खुद श्रीकृष्ण विराजमान की भक्त बन कर सामने आई हैं। अदालत में सबसे पहले इस संबंध में वाद पेश करने वाली सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता द्वारा पूर्व में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट तथा शाही ईदगाह मस्जिद से संबंधित पदाधिकारियों के बीच में समझौते को गलत बताया।

नारद संवाद

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