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नई दिल्ली। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) से जुड़े 4 विधेयकों को लोकसभा ने बुधवार को मंजूरी दे दी। अब यह 1 जुलाई से लागू होना तय माना जा रहा है। आजादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार कहे जाने वाले जीएसटी का उद्देश्य पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं की दर को एक समान रखना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी को क्रांतिकारी कदम बताया है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नया नारा दिया- नया साल, नया कानून, नया भारत। टैक्स ऑन टैक्स खत्म होगा। नए बिल में केंद्र और राज्य मिलकर मैक्सिमम 40 प्रतिशत तक टैक्स लगा सकते हैं। रिटर्न तीन महीने के बदले हर महीने भरना होगा। साथ ही कर चोरी या गलत रिफंड जैसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। बिल में टैक्स अफसरों पर भी अंकुश लगाया गया है।
छोटी-मोटी गलतियों के लिए वे पेनाल्टी नहीं लगा सकते। काउंसिल ने सालाना 20 लाख रु. तक के कारोबारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है। जीएसटी से जुड़ी बहुत सी बातें नियम तय होने के बाद साफ होंगी। इसके लिए 31 मार्च को काउंसिल की बैठक होनी है। पूरा देश एक मार्केट हो जाएगा जहां के तमाम राज्यों के बीच सामानों की बेरोकटोक ढुलाई हो पाएगी। टैक्स कम्प्लायंस तेज और आसान तो होगा ही। इस पर लागत भी कम आएगी। कुछ टैक्स में छूट और कुछ के पूरी तरह खात्मे की वजह से टैक्स कलेक्शन का दायरा बढ़ेगा और सरकारी खजाने में आमदनी बढ़ेगी। गरीब राज्यों को ज्यादा आमदनी होगी। दायरे में क्या नहीं
- पेट्रोलियम उत्पाद
- पंचायत/नगरपालिका/जिला परिषद द्वारा वसूले जाना वाला एंटरटेनमेंट और एम्यूजमेंट टैक्स।
- एल्कोहल/शराब पर टैक्स।
- स्टाम्प ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी।
- बिजली की खपत और बिक्री पर टैक्स।
जीएसटी लागू होने के बाद
जीएसटी राज्यों के स्थानीय और केंद्र के करों को एक में समाहित कर देगा। सभी सामान और सेवाओं पर एक कर वसूला जाएगा। मान लें कि जीएसटी की दर 18 फीसदी है तो केंद्रीय जीएसटी और राज्य जीएसटी में 9-9 फीसदी का बंटवारा होगा। हालांकि बिल पारित होने के बाद भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यथा-
- सर्विस सेक्टर इसका विरोध कर सकता है, क्योंकि उन्हें केंद्र के साथ हर राज्य में पंजीकरण
कराना होगा। इस तरह हर बिजनेस को अखिल भारतीय स्तर पर 60 रजिस्ट्रेशन कराने होंगे, जबकि इस वक्त सिर्फ एक रजिस्टे्रशन से काम चल जाता है। इससे उनकी लागत बढ़ जाएगी।
- रिटेल सेक्टर इसका विरोध कर सकता है, क्योंकि उनके टैक्स में बढ़ोतरी होगी और उन्हें राज्यों के साथ केंद्र सरकार के नियमों का पालन भी करना होगा।
- दोहरे नियंत्रण से बिजनेसमैन को प्रताडि़त करने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
- जीएसटी नेटवर्क शुरुआती दौर में कुछ ऑपरेशनल परेशानियां बढ़ा सकता है।
- जीएसटी लागू होने के बाद विनिर्मित वस्तुओं पर भी समान दर से कर लगेगा, जो वर्तमान से सस्ता होगा।
नकारात्मक पक्ष
- सेवाओं पर टैक्स 15 से बढकऱ 18 फीसदी हो जाएगा।
- रिटेल पर टैक्स लगभग दोगुना हो जाएगा।
- हर बिजनेस पर केंद्र और राज्य के टैक्स का दोहरा नियंत्रण होगा, जिससे बिजनेस की अनुपालन लागत बढ़ जाएगी।
- टैक्स से जुड़े सारे क्रेडिट जीएसटी नेटवर्क से ऑनलाइन कनेक्टिविटी के बाद ही हासिल हो पाएंगे। इससे छोटे बिजनेसमैन को सिस्टम का इस्तेमाल करने में परेशानी हो सकती है।
अंतरराज्यीय स्तर पर सामान मंगवाना फायदेमंद।
- आपूर्तिकर्ता/वेंडर के लिए अवसर खुलेंगे।
- सामान लेना और उसका डिस्ट्रीब्यूशन सस्ता।
- सामान खरीदने और बेचने के वर्तमान नेटवर्क के ढांचे में बदलाव लाना होगा।
- टैक्स कम होने से उत्पादों की कीमतें फिर से तय करनी होंगी।
- सामान को कारखाने से निकालने के समय लगने वाला एक्साइज टैक्स हटने के बाद सिर्फ बिक्री और आपूर्ति के समय टैक्स।
- बिजनेस के एकाउंटिंग तथा आई सिस्टम में बदलाव होगा।
- वर्तमान ओपन ट्रान्जेक्शन और बैलेंस का सही तरीके से समायोजन करना होगा।
- कर्मचारी प्रशिक्षण और उपभोक्ता जागरूकता पर खर्च बढ़ाना होगा
जीएसटी के फायदे।
- कई स्तर पर लगने वाले टैक्स खत्म होंगे।
- भारत एक बाजार का रूप ले लेगा।
- निर्माताओं पर टैक्स का बोझ कम होगा तो इससे वे अपना व्यापार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा प्रतियोगी रूप से बढ़ा पाएंगे।
- सामान और सेवाओं पर एक दर से टैक्सों की वसूली को लेकर चल रहे विवादों में कमी आएगी।
- विदेशी निवेशकों में भारत की छवि सुधरेगी और यहां कारोबार करना ज्यादा आसान हो जाएगा।
साभार-khaskhabar.com













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