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ड्रिप स्प्रिंकलर और सेंसर आधारित सिंचाई तकनीकों को प्रोत्साहन

जल संरक्षण के लिए भारत सरकार आज कृषि क्षेत्र में किसानों को सिंचाई की नई-नई तकनीकों से भी अवगत करा रही है। ड्रिप स्प्रिंकलर और सेंसर आधारित जैसी सिंचाई तकनीकें आज कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल की जा रही हैं। बता दें, किसानों के लिए सिंचाई को आसान बनाने के लिए सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली विकसित की गई है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसमें किसानों को खेती की नमी की जानकारी भी मिल जाती है जिसके जरिए किसान अपने खेत में गए बिना ही मोबाइल एप्लिकेशन या वेबसाइट से सेंसर स्वचालित मोटर से सिंचाई कर सकते हैं। वहीं जहां पानी की कमी है या सूखा ग्रस्त क्षेत्र हैं वहां, ड्रिप (Drip Irrigation) और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों को अपनाकर जल संरक्षण की कवायद की जा रही है।

दो साल में 22.47 हजार हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता का किया विकास

याद हो दिसंबर 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2021-26 के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। इसके तहत 93,068 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया, जिसमें राज्यों के लिए 37,454 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल थी। वहीं इसके जरिए लगभग 22 लाख किसानों को फायदा होने की बात कही गई थी। आज केंद्र सरकार द्वारा ऐसी योजनाओं के जरिए देश में सिंचाई क्षमता मजबूत हो रही है। 'Catch the Rain' अभियान के शुरू होने के दो साल में देश में 22.47 हजार हेक्टेयर भू-भाग में सिंचाई क्षमता का विकास किया गया।

प्रत्येक जिले में कम से कम 75 अमृत सरोवरों के निर्माण का संकल्प

गौरतलब हो, पीएम मोदी ने देश के हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने का भी संकल्प देश की जनता के साथ मिलकर लिया है। ऐसे में आप कल्पना कर सकते हैं कि यह कितना बड़ा अभियान है। इस अभियान को आगे बढ़ता देख आज प्रतीत होता है कि अब वह दिन दूर नहीं होगा जब आपके अपने शहर में 75 अमृत सरोवर नजर आएंगे। इसी अभियान के तहत आज देश में 30,000 अमृत सरोवर बनाए भी जा चुके हैं। इनके जरिए अब धरती की प्यास बुझ रही है और भू-जल स्तर में भी सुधार आ रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि देश के हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाने का संकल्प तेजी से आकार ले रहा है। जी हां, ‘मिशन अमृत सरोवर’के शुभारंभ के 9 महीने के भीतर 30 हजार से अधिक अमृत सरोवर का निर्माण पूरा भी कर लिया गया है।

ग्राउंड वाटर का संरक्षण क्यों है जरूरी ?

आज के समय में हमारे लिए ग्राउंड वाटर का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। धरातल का दो-तिहाई भाग पानी से घिरे होने के बावजूद भी हमें पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध नहीं होता क्योंकि इसका दो से तीन प्रतिशत जल ही हमारे इस्तेमाल के लायक है। आज भारत सहित विश्व के अनेक देश जल संकट की समस्या से जूझ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस समय भारत में विश्व की करीब 17% आबादी निवास करती है जबकि इसके मुकाबले यहां जल बेहद कम है। वर्तमान में भू-जल संसाधनों का उपयोग पीने, सिंचाई और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है, लेकिन जनसंख्या में तीव्र वृद्धि, शहरीकरण, औद्योगीकरण और कृषि गतिविधियों के कारण भू-जल संसाधन पर दबाव बढ़ गया हैं। ऐसे में हमारे लिए ताजा पानी के लिए ग्राउंड वाटर का संरक्षण बेहद जरूरी हो गया है। इस समस्या की गंभीरता से समझते हुए अब देश के युवाओं को इस अभियान में अपना सहयोग करना होगा, तब जाकर वे अपना और अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रख पाएंगे।

नारद संवाद

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