BREAKING NEWS

मीडियाभारती वेब सॉल्युशन अपने उपभोक्ताओं को कई तरह की इंटरनेट और मोबाइल मूल्य आधारित सेवाएं मुहैया कराता है। इनमें वेबसाइट डिजायनिंग, डेवलपिंग, वीपीएस, साझा होस्टिंग, डोमेन बुकिंग, बिजनेस मेल, दैनिक वेबसाइट अपडेशन, डेटा हैंडलिंग, वेब मार्केटिंग, वेब प्रमोशन तथा दूसरे मीडिया प्रकाशकों के लिए नियमित प्रकाशन सामग्री मुहैया कराना प्रमुख है- संपर्क करें - 0129-4036474

ग्राम पंचायतों में नफरत की राजनीति, वोट नहीं तो काम नहीं!

मथुरा। ग्राम पंचायतों में नफरत की राजनीति हो रही है। जीते और हारे प्रत्याशियों के बीच आये दिन झगडे की घटनाएं हो रही हैं। कई ग्राम पंचायतों में फायरिंग तक हुई हैं। बल्देव क्षेत्र के एक गांव में इसी तरह के झगडे में राशन डीलर की मौत हो गई थी। बात सिर्फ झगडे तक सीमित नहीं है।

विकास कार्यों में भी नफरत की राजनीति साफ दिख रही है। जो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मंे जीत गये हैं वह इस बात का हिसाब किताब लगा रहे हैं कि उन्हें किसने वोट दिया और किसने नहीं दिया। किसने चुनाव के दौरान खुल कर विरोध किया था अथवा कौन कडवे शब्द बोला थे। इस सब हिसाब किताब के बाद ही ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत में विकास कार्यों का खाका खींच रहे हंै।

यही वजह है कि जहां काम होना चाहिए वहां हो नहीं रहा और जहां काम की जरूरत नहीं है वहां जबरन पैसा खफाया जा रहा है। यह आरोप गांव गांव ग्रामीण लगा रहे हैं। गांवों में जलभराव बडी समस्या बनी हुई है। कोई ग्राम पंचायत ऐसी नहीं जहां जलभराव की समस्या से ग्रामीण जूझ रहीं रहे हों। इसके पीछी प्रशासन की लापवाही और शिकायतों की ठंडे बस्ते में डालने की आदत और जनप्रतिनिधियों की वोट की राजनीति जिम्मेदार है।

बडी ग्राम पंचायतों में वाटर स्टोरजे सिस्टम ध्वस्त हो गया है। काई ग्राम पंचायत ऐसी नहीं जहां पोखर औ तालाबों पर कब्जे नहीं हुए हों। इन कब्जों को हाटने को लेकर लगातार विवाद हो रहे हैं। राशन डीलर की मौत भी पोखर खुदाई के दौरान हुए झगडे में गोली लगने से हुई थी। तालब पोखरांे पर कब्जे के अलावा विकास कार्यों के दौरान मानकों का ख्याल नहीं रखने से भी समस्या पैदा हुई है। रास्तों को लगातार उंचा किया गया है, जिससे मकान नीचे पड गये हैं। पोखर तालाब पर कब्जा हो जाने और जल निकासी का रास्ता अवरूद्ध हो जाने से बरसात होने पर पानी घरों में भर जाता है।

गांव के रास्ते अवरूद्ध हो जाते हैं। इसके बाद झगडे होते हैं। समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत ही ग्रामीणों के पास संभवतः एकमात्र माध्यम है। यहां जीते हुए प्रत्याशी और हारे हुए प्रत्याशी नफरत की रजनीति के चलते काम करने से बचने के बहाने तलाशते रहते हैं।

राया विकास खंड की ग्राम पंचायत काराब की यही हालत है। यहां वर्षों से गांव के मुख्य रास्ते जल निकासी नहीं होने से अवरूद्ध रहते हैं।  ग्राम पंचायत पचावर का मामला हो अथवा कोयल ग्राम पंचायत के मजरा नगला अमरूआ का हो। यहां गांव के मुख्य मार्ग पर पानी हिलोरें मार रहा है। ग्रामीणों को गंदे पानी से होकर गुजरना पडता है। नव निर्वाचित प्रधान इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

नारद संवाद

देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि

Read More

हमारी बात

Bollywood


विविधा


शंखनाद

पुरानी कहावत और नया भारत

Read More