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नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2.50 रुपए प्रति लीटर की कमी का फैसला करने के बावजूद भारत में ईंधन की खुदरा दरें बढ़ रही हैं। तेल की लगातार बढती कीमतों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर पर बैठक हुई। इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली और पेट्रोलियम मत्री धर्मेंद्र प्रधान की मौजूदगी में तेल की दरों को रोकने के लिए संभावित उपायों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में आने वाले निर्णयों में से एक यह है कि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) को ईंधन की कीमतों में और सब्सिडी देने के लिए नहीं कहा जाएगा।
इससे पहले 4 अक्टूबर को केंद्र ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों के लिए 2.50 रुपए प्रति लीटर का कटौती की घोषणा की और कहा कि एक्साइज ड्यूटी कट का 1.50 रुपए प्रति लीटर सरकार के जरिए उठाया जाएगा जबकि बाकी 1 रुपए प्रति लीटर कट तेल विपणन कंपनियों के जरिए वहन किया जाएगा। कटौती की घोषणा करते हुए जेटली ने राज्य सरकारों से भी ईंधन की कीमतों में कटौती की अपील की थी ताकि कुल मूल्य कटौती 5 रुपए प्रति लीटर हो।
जिसके बाद कई राज्य सरकारों ने केंद्र सरकार का साथ देते हुए तेल की कीमतों में कटौती की। जेटली का कहना है कि एक्साइज ड्यूटी में 1.50 रुपए प्रति लीटर कटौती करने का फैसला केंद्र सरकार को इस वित्त वर्ष में 10,500 करोड़ रुपए का बोझ डालेगा।
बता दे, देश में तेल की लगातार बढ़ती कीमतों से हाहाकार मचा हुआ है। एक ओर जनता जहां इन दामों से परेशान है वहीं दूसरी ओर विपक्ष मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर है। केंद्र सरकार द्वारा दी गई मामूली राहत के कुछ दिन बाड़ा हालात फिर से पहले जैसे हो गए हैं। तेल के दामों में ये बढ़ोतरी उस समय हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पांच डॉलर तक कम हुई है। अब ऐसे में कांग्रेस के केंद्र सरकार पर जुबानी हमले और तेज हो गए हैं।
साभार-khaskhabar.com













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