देवरिया का ऐसा मंदिर जिसे श्रद्धालु बताते हैं 'अश्वत्थामा' की तपोभूमि
Read Moreमथुरा। राघवेन्द्र पाण्डव को विश्व स्वास्थ्य संगठन का प्रतिष्ठित इंटरनेशनल फॉरेंसिक साइंस अवार्ड मिला है। फिल्म डायरेक्टर और भारत सेवा आर्ट्स के अध्यक्ष राघवेन्द्र पाण्डव को वल्र्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की तरफ से इंटरनेशनल फॉरेंसिक साइंस अवार्ड से सम्मानित किये जाने पर राघवेन्द्र पाण्डव ने बताया कि कोरोना वायरस की महामारी ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया है। हर तरह अफरातफरी का माहौल बना हुआ है, इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से कोरोना वायरस बीमारी को लेकर प्रिवेंशन ऑफ कोरोना वायरस डिजीज ऑनलाइन प्रतियोगिता हुई। जिस में फॉरेंसिक साइंस से संबंधित पांच प्रश्न पूछे थे। राघवेन्द्र पाण्डव ने पांचों प्रश्नों का सही उत्तर दिया और उन को डब्ल्यू.एच.ओ की तरफ से एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
राघवेन्द्र पाण्डव ने कहा कि इस कोराना वायरस से सभी त्रस्त हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जो कि इस महामारी में लॉक डाउन के चलते बेरोजगारी से जूझ रहे हैं और उन के सामने राशन पानी की अधिक समस्या है। बहुत से ऐसे लोग हैं जो स्वाभिमान के चलते किसी से भी ना तो मदद की कह सकते और ना ही अपनी बेबसी दिखा सकते। राघवेन्द्र पाण्डव ने बताया कि भारत सेवा आर्ट्स परिवार की समस्त टीम के सहयोग से ऐसे लोगों की मदद वो जब से लॉक डाउन शुरू हुआ है तब से निरंतर कर रहे हैं। सेवा करते समय फोटो क्लिक नहीं होने देते क्योंकि इस सब से जिस की आप मदद कर रहे हो उस के व्यक्तित्व को ठेस पहुंचती है। कोई भी समाज सेवी ऐसा ना करे इस को लेकर राघवेन्द्र पाण्डव ने एक शॉर्ट फिल्म भी बनाई है जिस में ये बताया है कि सेवा करते समय किसी गरीब का मजाक ना बनाएं। आगे जानकरी देते हुए राघवेन्द्र पाण्डव ने बताया कि वो समय समय पर वीडियो फिल्म के द्वारा इस कोरोना वायरस महामारी से बचने और लडने के उपाय बताते हुए चल रहे हैं जिस से लोगों में जागरूकता पैदा हो सके। प्रवासी मजदूरों की समस्या बहुत पीडा दे रही है और सभी मजदूर एक साथ पलायन कर रहे हैं। पैदल ही अपने छोटे छोटे बच्चों के साथ चल रहे हैं ऐसे में भारत सेवा आर्ट्स परिवार की टीम उन सभी मजदूरों को विगत कई दिनों से बच्चों के लिए बिस्कुट, ब्रेड, फ्रूटी आदि वितरण कर रही हैं और बड़ो ंके लिए पूरी सब्जी के पैकेट्स के साथ पानी की सेवा प्रदान कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस समय सभी को मिलकर गरीब मजदूर की मदद करनी चाहिए लेकिन सेवा करते समय फोटो से दूर रहना चाहिए। एक बार बिना फोटो खिंचवाए सेवा कर के देखो बहुत सुकून मिलेगा। क्यूंकि निस्वार्थ भाव की सेवा का फोटो तो ऊपर वाला भगवान खींच रहा है। फोटो खींच कर हम लोगों की मदद तो करते है लेकिन उनका मजाक भी बनाते हैं।













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